मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय में पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह डिजिटल और स्मार्ट बोर्ड के जरिये पढ़ाई होगी। इसके साथ ही आधुनिक फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कंप्यूटर लैब्स भी होंगी। सुविधायुक्त खेल का मैदान भी विकसित किया जाएगा।
ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अब शहर के कॉन्वेंट स्कूलों की तरह शिक्षा और सुविधाएं उनके अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी। प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12वीं तक की पूरी पढ़ाई एक ही विद्यालय में कर सकेंगे। इसके लिए खजनी तहसील क्षेत्र के बेलघाट गांव में अत्याधुनिक 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' का निर्माण शुरू हो गया है।
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करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस मॉडल विद्यालय का निर्माण 27 मई से शुरू हो गया है और नवंबर 2027 तक इसे बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण के लिए 25 करोड़ 33 लाख 44 हजार रुपये की इस परियोजना में पहली किस्त के रूप में बेसिक शिक्षा विभाग ने 8 करोड़ 83 लाख 20 हजार रुपये अवमुक्त कर दिए हैं।
विद्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर का विशेष ख्याल रखा जाएगा। मॉडल विद्यालय पूरी तरह हाईटेक होगा। इसमें मुख्य भवन, मिड डे मील भवन, बाल वाटिका भवन, मल्टीपर्पज हाल, स्टाफ आवास, प्रिंसिपल आवास, डॉरमेट्री, गार्ड रूम, बाउंड्रीवाल के निर्माण साथ ही फायर सेफ्टी और विभिन्न सिविल-इलेक्ट्रिकल कार्य कराए जाएंगे।
कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश जल निगम (शहरी) की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज यूनिट 19 के सहायक अभियंता संदीप ने बताया कि इस मॉडल विद्यालय के निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। नवंबर 2027 तक यह विद्यालय पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद ग्रामीण बच्चों के लिए इसे खोल दिया जाएगा।
डिजिटल और स्मार्ट बोर्ड के जरिये होगी पढ़ाई
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय में पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह डिजिटल और स्मार्ट बोर्ड के जरिये पढ़ाई होगी। इसके साथ ही आधुनिक फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कंप्यूटर लैब्स भी होंगी। सुविधायुक्त खेल का मैदान भी विकसित किया जाएगा।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को कंप्यूटर एप्लीकेशंस, कोडिंग और वोकेशनल कोर्सेज की ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि वे भविष्य के लिए तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के संचालित होने से न केवल ग्रामीण और गरीब परिवारों पर निजी स्कूलों की महंगी फीस का बोझ कम होगा, बल्कि गांवों में छिपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए एक सही और आधुनिक मंच मिलेगा। नवंबर 2027 तक विद्यालय बनकर तैयार करने का लक्ष्य कार्यदायी संस्था को दिया गया है: धीरेंद्र त्रिपाठी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी