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गोरखपुर विश्वविद्यालय: छात्रावास से सामान ले गए ज्यादातर छात्र, कई कमरों में अब भी बंद हैं ताले

Sat, 20 Aug 2022 11:15 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

विवि प्रशासन के मुताबिक करीब 66 छात्र अब भी हॉस्टल में परीक्षाओं के चलते रह रहे थे। छात्रहित को देखते हुए इन छात्रों को एक सप्ताह के लिए दूसरे हॉस्टलों में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। सिर्फ उन्हीं छात्रों को ही दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट किया जा रहा है, जिनके पास वैध पहचान पत्र है या वे फॉर्म भर रहे हैं।
 
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छात्रों को समझाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नाथ चंद्रावत (एनसी) हॉस्टल को खाली कराने में शुक्रवार को पूरे दिन विश्वविद्यालय प्रशासन लगा रहा। ज्यादातर छात्र सामान लेकर चले गए, जबकि कुछ कमरों में छात्र ताला लगाकर फरार हैं। उनके कमरों के सामने साइकिलें भी खड़ी हैं। हालांकि, विवि प्रशासन का दावा है कि हॉस्टल खाली करा लिया गया है। वहीं, हॉस्टल में पुलिस भी मुस्दैत रही और पल-पल की जानकारी पुलिस के आला अधिकारी लेते रहे।

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एनसी हॉस्टल को खाली कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महीने पहले भी आदेश जारी किया था। हॉस्टल को खाली कराकर मरम्मत कराई जानी है लेकिन, छात्रों ने सेमेस्टर की परीक्षा का हवाला देकर रहने का अनुरोध किया था। जिसके बाद विवि प्रशासन का रुख भी नरम पड़ गया। बुधवार की देर रात हुए छात्रों के दो गुटों में बवाल, फायरिंग व आगजनी के बाद विवि प्रशासन ने बृहस्पतिवार को तत्काल हॉस्टल खाली करने का नोटिस चस्पा कर दिया।

शुक्रवार को सुबह से ही छात्र हॉस्टल खाली करने लगे। शाम तक ज्यादातर छात्र अपना सामान लेकर चले गए। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह व नियंता मंडल की टीम करीब दो घंटे तक हॉस्टल में रही। जबकि, वार्डेन प्रो. एसके सिंह के पास मुख्य नियंता का भी प्रभार है, इसलिए उन्हें प्रशासनिक भवन पर भेजा गया था जहां छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। प्रो. सिंह ने बताया कि जो छात्र हॉस्टल खाली नहीं करेंगे, उनकी सूची तैयार की जाएगी। ऐसे छात्रों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। हॉस्टल के प्रथम तल पर सात-आठ कमरों के बाहर छात्रों की साइकिलें खड़ी थीं। कमरे में छात्रों के सामान भी है। लेकिन, बवाल के बाद से ही छात्र हॉस्टल से गायब हैं।
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एनसी हॉस्टल के दो कमरों में हुई थी तोड़फोड़
एनसी हॉस्टल में एक नहीं, दो कमरों में तोड़फोड़ की गई थी। तीसरे मंजिल पर कमरा नंबर 131 का ताला तोड़कर आगजनी भी की गई। उसके बगल में कमरा नंबर 132 में भी उपद्रव करने वालों तोड़फोड़ किया। पंखे को तोड़ दिया, सामान को तितर-बितर कर किताबें फाड़ दीं।  ब्यूरो

पापा! सामान लेकर कहां जाऊं... गांव आ रहा हूं
हॉस्टल छोड़ने के बाद छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सामान लेकर कुछ छात्र किराए पर रहने वाले अपने दोस्तों के पास चले गए। जबकि, कुछ ने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। वहीं, कुछ ऐसे भी छात्र थे जिन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि कहां जाएं।

हॉस्टल में रहने वाले अजीत बार-बार पापा से बात कर रहे थे। सारा सामान कमरे के बाहर रखा था। अजीत ने कहा कि पापा अब सामान लेकर कहां जाऊं। किसके पास रहूं, मैं अब गांव ही आ रहा हूं। बीए द्वितीय वर्ष के त्रिभुवन ने बताया कि एक मित्र से बात हुई है, सप्ताह भर रहूंगा। अचानक हॉस्टल खाली करने से बहुत परेशानी बढ़ गई है। कुछ लोगों की मनबढ़ई का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।

 
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सप्ताह भर के लिए दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट कराने का निर्णय
विवि प्रशासन के मुताबिक करीब 66 छात्र अब भी हॉस्टल में परीक्षाओं के चलते रह रहे थे। छात्रहित को देखते हुए इन छात्रों को एक सप्ताह के लिए दूसरे हॉस्टलों में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। सिर्फ उन्हीं छात्रों को ही दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट किया जा रहा है, जिनके पास वैध पहचान पत्र है या वे फॉर्म भर रहे हैं।

नए सिरे कमरों का होगा आवंटन
मीडिया सेल से जारी सूचना के मुताबिक एक सप्ताह के बाद नए सिरे से एनसी समेत सभी हॉस्टलों के कमरों का आवंटन होगा। ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से अभ्यर्थियों को आवंटन का आवेदन फार्म भरना होगा। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आवेदन पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। आईडी कार्ड से मिलान के बाद ही विद्यार्थियों को हॉस्टल का आवंटन होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है छात्रावास में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जो विद्यार्थी अराजक तत्वों का साथ देंगे, उन्हें भी निष्कासित किया जाएगा।

छात्रसंघ चुनाव तय नहीं, बैनर-पोस्टर लगे और हंगामा शुरू
विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर अभी विवि प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया है। लेकिन, चुनाव को लेकर छात्रनेताओं ने बैनर-पोस्टर लगाने शुरू कर दिए हैं। लगातार धरना-प्रदर्शन और हंगामा भी चल रहा है।
विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव अंतिम बार 2016 में हुआ था, जिसमें अरविंद कुमार यादव उर्फ अमन अध्यक्ष, अखिलदेव त्रिपाठी उपाध्यक्ष और ऋचा चौधरी महामंत्री चुनी गईं थीं। इसके बाद वर्ष 2018 में चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। 4 व 5 सितंबर को नामांकन हुआ और 13 सितंबर को मतदान होना था।

इसी बीच छात्रों के दो गुटों में बवाल हो गया। विवि प्रशासन ने चुनाव स्थगित कर दिया। इसके बाद से हर साल चुनाव की मांग होती है, धरना-प्रदर्शन भी होते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इस वर्ष भी चुनाव को लेकर छात्रों ने तैयारियां तेज कर दी है। एनसी हॉस्टल में हुआ बवाल भी इसी से जुड़ा है। अध्यक्ष पद की तैयारी कर रहे यशपाल सिंह व हिमांशु सिंह हॉस्टल में पैठ बनाने में जुटे हैं। वर्चस्व की जंग में ही दोनों गुटों में बवाल भी हुआ।
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