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अनोखी शादी: गोरखपुर के जंगल कौड़िया में बैंड-बाजे के साथ निकली कुत्ते की बरात, लोगों ने खूब उड़ाई दावत

Mon, 12 Oct 2026 10:56 AM IST
अनुराग रंजन संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर

सार

महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र चौकमाफी के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. विवेक प्रताप सिंह का कहना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में नई परंपरा को बढ़ावा मिल सकता है जो पशुओं के हित में नहीं है।
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जंगल कौड़िया में बैंड-बाजे के साथ निकली कुत्ते की बरात - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हाथी-घोड़े की सवारी, बैंड-बाजे की धुन और मेहमानों के लिए दावत... यह किसी आम शादी का नजारा नहीं, बल्कि जसवल बाजार गांव में पालतू कुत्ते जय और कुतिया गुड़िया के विवाह समारोह का दृश्य है। गांव के विवेक भूषण सहानी ने शनिवार को पूरे रीति-रिवाज के साथ दोनों की शादी कराई। अनोखे विवाह की चर्चा क्षेत्र में खूब हो रही है वहीं समारोह के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं।
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शाही अंदाज में हुई शादी, गांव वालों ने खाया भोज
विवेक भूषण सहानी ने अपने पालतू जय और गुड़िया के विवाह को यादगार बनाने के लिए भव्य आयोजन किया। हाथी-घोड़े और बैंड-बाजे के साथ निकले समारोह में गांव के लोगों ने भी हिस्सा लिया। विवाह के बाद आयोजित भोज में मेहमानों ने पकवानों का आनंद लिया। बताया जा रहा है कि इस आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। पूरे पारंपरिक अंदाज में आयोजित इस शादी को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता रही।

जय और गुड़िया के लिए बन रहा पक्का मकान
विवेक भूषण सहानी ने बताया कि पालतू जानवरों के प्रति लगाव इस अनोखे आयोजन तक ही सीमित नहीं है। बताया कि वह जय और गुड़िया के रहने के लिए पक्का मकान भी बनवा रहे हैं। दोनों के लिए अलग से रहने की व्यवस्था करने की उनकी पहल भी गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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सोशल मीडिया पर छाई अनोखी शादी
जय और गुड़िया की शादी की चर्चा अब गांव से निकलकर आसपास के क्षेत्र तक पहुंच गई है। हाथी-घोड़े, बैंड-बाजे और भोज के साथ आयोजित इस अनोखी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है। आमतौर पर इन्सानों की शादियों में दिखने वाली रस्मों और भव्य आयोजनों को पालतू कुत्तों की शादी में देखने की बात लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है। क्षेत्र में इस अनोखी शादी की चर्चा हर किसी की जुबान पर है।

इस संबंध में महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र चौकमाफी के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. विवेक प्रताप सिंह का कहना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में नई परंपरा को बढ़ावा मिल सकता है जो पशुओं के हित में नहीं है। पशुओं के प्राकृतिक स्वभाव के साथ छेड़छाड़ करना उचित नहीं है।
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