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कोरोना का असर: रोडवेज को नहीं मिल रही है सवारी, 73 बसों ने किया सरेंडर

Sat, 22 May 2021 03:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

मई माह में 54 निगम की और 19 अनुबंधित बसें की जा चुकी हैं सरेंडर। एक करोड़ से घटकर 35 से 40 लाख रुपये हुई रोडवेज की प्रतिदिन की आय।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कोरोना कर्फ्यू में भले ही रोडवेज बसों का संचालन हो रहा है। लेकिन यात्रियों की कमी से परिवहन निगम को घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इस घाटे को कम करने के लिए रोडवेज बसों को सरेंडर कर रहा है। अब तक परिक्षेत्र में इस माह निगम और अनुबंधित बसों को मिलाकर 73 बसे सरेंडर की जा चुकी हैं।
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कोरोना संक्रमितों की बढ़ रही संख्या के बीच लगे कोरोना कर्फ्यू में रोडवेज बसों का संचालन हो रहा है। बाहर से आने वाले प्रवासियों को छोड़ दें तो यहां से सफर करने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इससे रोडवेज को हर दिन घाटा भी हो रहा है। ऐसे में रोडवेज अपने खर्च को कम करने के लिए बसों को सरेंडर करने की शुरुआत कर दी है। 

पहले 54 निगम की बसें सरेंडर की गई थीं और अब शुक्रवार को 19 अनुबंतिध बसों को सरेंडर किया गया। कुल मिलाकर अबतक 73 निगम ओर अनुबंतिध बसों को सरेंडर किया जा चुका है। गोरखपुर परिक्षेत्र के आठ डिपो से संचालित हो रही रोडवेज की बसों से प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये की आय होती है, लेकिन कोरोना के कारण मई माह से यात्रियों की घटती संख्या से रोडवेज की आय भी लगातार घट रही है। 
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वर्तमान में प्रतिदिन करीब 35 से 40 लाख रुपये की आय अब रोडवेज को हो रही है। कोरोना काल में यात्री कम हैं ऐसे में खाली बसें चलाने की बजाए रोडवेज संचालन बंद करना ही बेहतर समझ रहा है।
 
क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम पीके तिवारी ने बताया कि यात्रियों की संख्या कम होने से रोडवेज को काफी नुकसान हो रहा है। खड़ी बसों का टैक्स न देना पड़े, इसलिए अब बसों को सरेंडर किया जा रहा है। जब यात्रियों की संख्या बढ़ जाएगी तब बसों को फिर से रोडवेज के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा।
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