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Gorakhpur News: 12वीं की रीतिका, केले के रेशे से दे रहीं 40 को आजीविका, सीएम भी कर चुके हैं तारीफ

Sat, 10 Feb 2024 10:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो वंदना त्रिपाठी, गोरखपुर।

सार

रीतिका के अनुसार, केले का रेशा मजबूत होता है। इनसे बनी आर्टिफिशियल ज्वेलरी अगर ठीक से रखी जाए तो 4-5 साल तक इसका उपयोग हो सकता है। उन्होंने बताया कि अब तक पांच हजार से अधिक ज्वेलरी सेट बिक चुके हैं।
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रीतिका के साथ केले के रेशे से ज्वेलरी बनातीं समूह की सदस्य। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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12वीं में पढ़ने वाली रीतिका मौर्या ने दो साल पहले गोरखपुर महोत्सव में जूट से बने आकर्षक सजावटी सामान देखा तो उन्हें यह आइडिया भा गया। उन्होंने यू-टयूब खंगाला तो उनकी नजर केले के रेशे से बनी आर्टिफिशियल ज्वेलरी पर पड़ी।

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उन्होंने भी इन वीडियो से सीखकर हाथ आजमाया तो कामयाबी मिलने लगी। उनका यह शौक आज कमाई का एक जरिया भी बन चुका है। उनके साथ 40 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। उनकी बनाई ज्वेलरी की देश-विदेश में खूब डिमांड है।

शिवपुर सहबाजगंज की रहने वाली रितिका मौर्या की मां सुनीता ने बताया कि बेटी के जुनून को देखकर कुशीनगर से केले का रेशा ले आईं। उसने यू-टयूब की मदद से इस रेशे से 12 गुड़िया बनाई, जो मोहल्ले के लोगों ने तुरंत खरीद लिया।
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इससे उत्साह बढ़ा और उसने टोपी, सजावटी सामान और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनानी शुरू कर दी, जिसकी बिक्री अब बढ़ रही है। वर्तमान में 40 से अधिक महिलाएं अलग-अलग समूह बनाकर केले के रेशे से ज्वेलरी बना रही हैं। इसके साथ ही चेन्नई, हैदराबाद सहित अन्य जगहों पर लोग प्रशिक्षण देने के लिए भी बुला रहे हैं।
 

सीएम योगी भी कर चुके हैं सराहना
रीतिका ने बताया कि पिछले साल जागृति यात्रा के दौरान कोलंबिया की एक महिला उद्यमी से मुलाकात हुई। उन्हें हमारा सामान पसंद आया और सारा खरीद लिया। अब वह हमसे लगातार सामान मंगाती रहती हैं। सामाजिक संगठन शक्ति वैभव श्री के सदस्य ये ज्वेलरी अमेरिका ले गए, वहां भी लोगों को यह पसंद आया और अब वहां से भी लगातार मांग आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक प्रदर्शनी में उनके काम की सराहना की थी।
 
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केले के रेशे से बनी ज्वेलरी। - फोटो : अमर उजाला।
पांच हजार से अधिक ज्वेलरी सेट बिक चुके
रीतिका के अनुसार, केले का रेशा मजबूत होता है। इनसे बनी आर्टिफिशियल ज्वेलरी अगर ठीक से रखी जाए तो 4-5 साल तक इसका उपयोग हो सकता है। उन्होंने बताया कि अब तक पांच हजार से अधिक ज्वेलरी सेट बिक चुके हैं। उन्होंने बताया कि रेशे से धागा बनाने का काम सबसे कठिन होता है। अक्सर मरोड़ने के दौरान हाथ कट जाता है।

रीतिका ने बताया कि केले के रेशे के बंडल को पानी में भिंगो कर दो घंटे रखते हैं। इसके बाद उसमें लगे चिपचिपे पदार्थ को कंघी से साफ करके रंगते हैं। इसके बाद धूप में सुखाते हैं। इसके बाद महिलाएं रेशे से धागा बनाती हैं। फिर काॅर्ड बोर्ड को विभिन्न सेप में काटने का कार्य किया जाता है। कटे हुए काॅर्ड बोर्ड पर धागे के साथ स्टोन, मोती और शीशा लगाकर सुंदर लुक देने का काम किया जाता है।
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