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Exclusive: एमएमएमयूटी में साढ़े चार सौ छात्रों के शुल्क में हेराफेरी...जांच शुरू

Sat, 30 Dec 2023 10:47 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर एमएमएमयूटी विश्वविद्यालय में 400 छात्रों की फीस में बड़ी हेराफरी सामने आई है। यहां चार से साढ़े चार करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है। यहां बिना शुल्क जमा किए विद्यार्थियों ने पढ़ाई कर ली और परीक्षा भी देते रहे।
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MMMUT - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में बीटेक में फर्जी प्रवेश के मामले में जांच अभी चल ही रही है कि इसी बीच करीब 449 विद्यार्थियों के शुल्क में हेराफेरी का मामला सामने आ गया है। यह रकम चार से साढ़े चार करोड़ रुपये है। बीते दो-तीन सालों में विद्यार्थियों से बिना नोड्यूज प्रमाणपत्र लिए ही विभागों में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। इसमें कुछ विद्यार्थी विश्वविद्यालय छोड़ चुके हैं। विद्यार्थियों का दावा है कि उन्होंने शुल्क जमा किया है, लेकिन विश्वविद्यालय के खाते में रकम जमा ही नहीं है। मामला सामने आने पर कुलपति ने जांच शुरू करा दी है।

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एमएमएमयूटी में सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने के पहले कुलपति के निर्देश पर नोड्यूज प्रमाणपत्र की व्यवस्था इस बार सख्ती से लागू की गई। ऐसे में जब रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि अलग-अलग वर्षों के करीब 800 विद्यार्थियों का पूर्व में शुल्क ही विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं हुआ है। इसके बाद इन सभी विद्यार्थियों को नोटिस दिया गया कि वे शुल्क जमा करें। बहुत सारे विद्यार्थियों ने कुलपति से मुलाकात कर शुल्क की रसीद दिखा दी।

इसके बाद एक और नोटिस जारी कर कहा गया कि अगर शुल्क जमा किए हैं तो रसीद या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन दिखाकर वेरिफिकेशन करा लें। सप्ताह भर में करीब वेरिफिकेशन के बाद 449 विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब-किताब नहीं मिल पाया है। इनमें द्वितीय वर्ष के 200 और तृतीय वर्ष करीब 249 विद्यार्थी शामिल हैं। इस गड़बड़ी में एक रैकेट के शामिल होने की आशंका है। यह वही रैकेट है, जिसने 40 विद्यार्थियों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश दिला दिला दी थी। इनमें विश्वविद्यालय के पांच शिक्षक व कर्मचारी शामिल हैं।
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परीक्षा में बैठने के लिए सशर्त अनुमति
विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब 450 विद्यार्थियों को सशर्त परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। इन विद्यार्थियों की कापियां अलग रखी जाएंगी और शुल्क रसीद का परीक्षण होने के बाद ही इनका रिजल्ट घोषित होगा। अगर उन्होंने शुल्क जमा नहीं किया है तो जमा कराया जाएगा। विश्वविद्यालय को सबसे मुश्किल उन विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब-किताब करना होगा, जिन्होंने किन्हीं कारणों से विश्वविद्यालय में अब पढ़ाई छोड़ दी है।

तीन दिन तक देर रात तक चला मिलान
विश्वविद्यालय में परीक्षा शुल्क का मिलान इस सप्ताह में तीन दिनों तक देर रात तक चला। इसमें परीक्षा नियंत्रक और लेखा विभाग के लोग भी मौजूद थे। काफी मशक्कत के बाद शुल्क नहीं जमा हो पाए विद्यार्थियों की सूची तैयार हो पाई।

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ऐसे हुई है लापरवाही
विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक, शुल्क में गड़बड़ी विभागों से हुई है। विद्यार्थियों को वर्ष के प्रथम सेमेस्टर में ही प्रवेश के दौरान साल भर का शुल्क जमा करना होता है। सेमेस्टर के हिसाब से यह शुल्क करीब 90 से 95 हजार रुपये है। डीन ने एक साथ शुल्क जमा न कराकर दो पार्ट में शुल्क जमा करने की अनुमति दे दी।

कुछ विद्यार्थियों ने कोरोना का हवाला दिया था तो कुछ आर्थिक परेशानी बताया। इन विद्यार्थियों ने एक पार्ट में शुल्क जमा कर दिया और दूसरे पार्ट का शुल्क ही जमा नहीं किया। इसकी जांच विभागों में कराई ही नहीं गई और न ही लेखा अनुभाग में देखा गया। विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। परीक्षा पास कर दूसरे साल में पहले सेमेस्टर में रजिस्ट्रेशन करा लिया। पिछले तीन सालों से यह खेल चला है।

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एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब लेखा अनुभाग में नहीं मिला तो जांच कराई गई। जिन विद्यार्थियों ने शुल्क जमा किया है, रसीद दिखाने पर उनका मिलान कराया गया। अभी भी बहुत सारे विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब लेखा विभाग में नहीं मिला है। ऐसे विद्यार्थियों को शर्त के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। शुल्क को लेकर बरती गई लापरवाही की जांच कराई जा रही है।
 
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