परीक्षा में बैठने के लिए सशर्त अनुमति
विश्वविद्यालय प्रशासन ने करीब 450 विद्यार्थियों को सशर्त परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। इन विद्यार्थियों की कापियां अलग रखी जाएंगी और शुल्क रसीद का परीक्षण होने के बाद ही इनका रिजल्ट घोषित होगा। अगर उन्होंने शुल्क जमा नहीं किया है तो जमा कराया जाएगा। विश्वविद्यालय को सबसे मुश्किल उन विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब-किताब करना होगा, जिन्होंने किन्हीं कारणों से विश्वविद्यालय में अब पढ़ाई छोड़ दी है।
तीन दिन तक देर रात तक चला मिलान
विश्वविद्यालय में परीक्षा शुल्क का मिलान इस सप्ताह में तीन दिनों तक देर रात तक चला। इसमें परीक्षा नियंत्रक और लेखा विभाग के लोग भी मौजूद थे। काफी मशक्कत के बाद शुल्क नहीं जमा हो पाए विद्यार्थियों की सूची तैयार हो पाई।
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ऐसे हुई है लापरवाही
विश्वविद्यालय के सूत्रों के मुताबिक, शुल्क में गड़बड़ी विभागों से हुई है। विद्यार्थियों को वर्ष के प्रथम सेमेस्टर में ही प्रवेश के दौरान साल भर का शुल्क जमा करना होता है। सेमेस्टर के हिसाब से यह शुल्क करीब 90 से 95 हजार रुपये है। डीन ने एक साथ शुल्क जमा न कराकर दो पार्ट में शुल्क जमा करने की अनुमति दे दी।
कुछ विद्यार्थियों ने कोरोना का हवाला दिया था तो कुछ आर्थिक परेशानी बताया। इन विद्यार्थियों ने एक पार्ट में शुल्क जमा कर दिया और दूसरे पार्ट का शुल्क ही जमा नहीं किया। इसकी जांच विभागों में कराई ही नहीं गई और न ही लेखा अनुभाग में देखा गया। विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई। परीक्षा पास कर दूसरे साल में पहले सेमेस्टर में रजिस्ट्रेशन करा लिया। पिछले तीन सालों से यह खेल चला है।
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एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब लेखा अनुभाग में नहीं मिला तो जांच कराई गई। जिन विद्यार्थियों ने शुल्क जमा किया है, रसीद दिखाने पर उनका मिलान कराया गया। अभी भी बहुत सारे विद्यार्थियों के शुल्क का हिसाब लेखा विभाग में नहीं मिला है। ऐसे विद्यार्थियों को शर्त के साथ परीक्षा में बैठने की अनुमति दी है। शुल्क को लेकर बरती गई लापरवाही की जांच कराई जा रही है।