विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त हुए कई बुजुर्गों का आरोप है कि विभाग विभिन्न परीक्षण के नाम पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों को लटका रहा है। कभी सीएमओ से परीक्षण तो कभी खुद के परीक्षण नाम पर भुगतान नहीं किया। जब इन प्रक्रियाओं को पूरा कर दिया गया तो अब इनकम टैक्स के नाम पर बिलों को लटकाया जा रहा है। अपनी समस्याओं से अवगत कराने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को कमिश्नर जयंत नार्लिकर से मिलेगा।
सिंचाई निर्माण मंडल गोरखपुर के कार्यालय अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त गिरीश नारायण श्रीवास्तव और गंडक सिंचाई कार्य मंडल-2 गोरखपुर से प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए सुरेश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि पहले सीएमओ से परीक्षण के बाद भी उनके बिलों से संबंधित फाइलें दबाए रखीं गईं। अब बताया जा रहा है कि बिलों पर इनकम टैक्स का निर्धारण हो रहा है। इसके बाद भुगतान होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इनकम टैक्स निर्धारण में मनमानी की जा रही है। इनका कहना है कि अव्वल तो वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों के 50 हजार तक के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल पर कोई टैक्स नहीं लगता। यदि लगता भी है तो आठ महीने से विभाग क्या कर रहा था? इस संबंध में जरूरी शासनादेश एकत्रित कर रहे हैं। इसके बाद कमिश्नर से मुलाकात करके अपनी बात रखेंगे।