फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विशेष खबर: पासपोर्ट-वीजा के लिए रस्म अदायगी तक सिमटीं विवाह पंजीकरण की बंदिशें

Tue, 19 Jan 2021 02:54 PM IST
vivek shukla अरुण चंद, गोरखपुर।

सार

  • योगी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने 2017 से अनिवार्य कर दिया है विवाह पंजीकरण
  • 2017 से दिसंबर 2020 तक जिले में महज 6862 विवाह के ही हुए पंजीकरण
विज्ञापन
Passport of India - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गोरखपुर जिले में विवाह पंजीकरण अब भी पासपोर्ट-वीजा पाने के लिए रस्म अदायगी तक ही सीमित रह गया है। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार की ओर से फरवरी 2017 में विवाह पंजीकरण सभी के लिए अनिवार्य किए जाने के बाद भी आंकड़ों में बहुत बढ़ोत्तरी नहीं दर्ज हो सकी है।

विज्ञापन


वह भी तब, जबकि फरवरी 2016 से ही यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है। यानी घर या फिर आसपास के किसी भी जनसेवा केंद्र या साइबर कैफे से मामूली खर्च पर पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है। रजिस्ट्री विभाग के अफसरों का मानना है कि विवाह पंजीकरण के फायदे आदि को लेकर अब भी लोगों में जागरूकता का अभाव है। इसे पासपोर्ट-वीजा के अलावा कुछ और जरूरी सेवाओं के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए।

2017 से अब तक के आंकड़े यह तस्दीक करते हैं कि जिले में विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता सिर्फ सरकारी कागजों तक ही सीमित रह गई है। तब से अब तक हर साल 1700 से 2200 के बीच ही शादियां पंजीकृत हुईं। कोविड- 19 की वजह से 2020 में तो यह आंकड़ा घटकर 1199 पर पहुंच गया। विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता की शर्त जुड़ने से पहले वर्ष 2016 में 1337 विवाह के पंजीकरण हुए थे।
विज्ञापन


 

ऑनलाइन सुविधा शुरू होने का पड़ा असर

फरवरी 2016 में विवाह पंजीकरण के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू हुई। दिसंबर 2016 तक 1337 जोड़ों ने शादी का पंजीकरण कराया । 2017 में 1717 ने पंजीकरण कराया। 2018 में पंजीकरण की संख्या बढ़कर 2202 पहुंच गई। हालांकि 2019 में यह आंकड़ा घटकर फिर 1744 पहुंच गया और 2020 में सबसे कम 1199 पंजीकरण कराए गए।

घर बैठे करें आवेदन, सिर्फ एक बार आना होगा रजिस्ट्री दफ्तर
उप निबंधक कार्यालय सदर प्रथम के सब रजिस्ट्रार योगेंद्र सिंह ने बताया कि विवाह पंजीकरण कराना अब आसान हो गया है। घर बैठे या नजदीक के किसी भी कैफे से मामूली खर्च पर आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के बाद आवंटित तिथि पर एक बार रजिस्ट्री दफ्तर आना होता है। ऐसा इसलिए, ताकि फर्जीवाड़ा न हो। दफ्तर में ही बायोमेट्रिक अंगूठे की छाप और फोटो ली जाती है जो सर्टिफिकेट पर दर्ज होती है। सब रजिस्ट्रार के सामने यह बताना होता है कि शादी कब और कहां की। दो गवाह की भी जरूरत होती है।
 
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
  • नवीन छायाचित्र 40 केबी से कम साइज का जेपीजी फार्मेट में
  • पहचान प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र एवं निवास प्रमाण पत्र का पीडीएफ फॉर्मेट

 
विज्ञापन

करा लीजिए अपने विवाह का पंजीकरण, ढेर सारे हैं लाभ

यदि आपने भी अपने विवाह का पंजीकरण नहीं कराया है तो करा लीजिए। इसके ढेर सारे लाभ हैं। महिलाओं के लिए तो यह ढेर सारी सहूलियत देने वाला है। एआईजी स्टांप कमलेश शुक्ल का कहना है कि इससे बाल विवाह पर लगाम लग सकती है।

पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी पर भी रोक लगने की पूरी उम्मीद है। कोई अपनी पत्नी को बिना कानूनी प्रक्रिया में आए तलाक नहीं दे सकेगा। पति के न रहने के बाद पत्नी को उसका हक और क्लेम आसानी से मिल सकेगा।  शादी दोनों पक्षों की रजामंदी से ही होगी।

मुस्लिमों का पहले मेहरनामा ही पंजीकृत होता था, अब निकाहनामा भी हो रहा
उप निबंधक योगेंद्र सिंह ने बताया कि 2017 से सभी के धर्मों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। पहले सिर्फ हिंदू विवाह का ही पंजीकरण होता था। मुस्लिमों के सिर्फ मेहरनामा का रजिस्ट्रेशन होता है, निकाहनामा का नहीं। प्रदेश सरकार द्वारा सभी धर्मों के लोगों का विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने के बाद अब मुस्लिमों के निकाह का भी पंजीकरण शुरू हो गया है। दूसरे धर्म के लोग भी पंजीकरण के लिए आ रहे हैं।

वर्ष                   पंजीकृत हुए विवाह
2016                 1337
2017                 1717
2018                 2202
2019                 1744
2020                 1199

एआईजी स्टांप कमलेश शुक्ला ने कहा कि विवाह पंजीकरण अनिवार्य होने के बाद पंजीकरण कराने वालों की संख्या थोड़ी जरूर बढ़ी है, लेकिन अब भी बड़ा वर्ग है जो जागरूकता नहीं दिखा रहा, जबकि इसके ढेर सारे लाभ हैं। जागरूकता अभियान के साथ ही कई जरूरी सुविधाओं के लिए इसे अनिवार्य करने का विकल्प आजमा कर पंजीकरण की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें