डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि तीसरे केस का मामला एकदम अलग था। दो बार संक्रमित होने के बाद जब उस व्यक्ति की जांच की गई तो पता चला कि उसके फेफड़े में क्लाटिंग थी, जो ठीक होने के बाद भी खत्म नहीं हुई। उसी क्लाटिंग में वायरस का लोड था, जो एंटीबॉडी खत्म होने पर दोबारा अटैक कर गया। इसके बाद वह व्यक्ति दूसरी बार संक्रमण का शिकार हो गया। इस व्यक्ति के अंदर एंटीबॉडी पूरी तरह से विकसित हो गई थी।
कम से कम छह से सात एस/सी यूनिट रहनी चाहिए एंटीबॉडी
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि सामान्य मनुष्य के शरीर में कम से छह से सात एस/सी यूनिट एंटीबॉडी रहनी चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति के अंदर 12 से 15 एस/सी यूनिट एंटीबॉडी रहती है। ऐसी स्थिति में 1.56 एस/सी यूनिट एंटीबॉडी बेहद चौंकाने वाला है। एंटीबॉडी को लेकर अब नए सिरे से शोध की जरूरत है।
दो दिनों के अंदर शोध होंगे जनरल में प्रकाशित
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि दो दिनों के अंदर तीनों व्यक्तियों पर किए गए शोध अमेरिका के इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित होगा। इस तरह के केस अब तक चीन, अमेरिका, इटली जैसे देशों में ही सामने आए हैं।