फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: रेपो रेट बढ़ा, महंगाई पर लगाम की कोशिश, निवेश और बाजार पर दबाव

Fri, 09 Oct 2026 03:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी से आम परिवार से लेकर उद्योग और शेयर बाजार तक असर पड़ने की संभावना है। 50 लाख रुपये के 20 वर्ष के होम लोन पर ब्याज दर 8.25 से 8.50 प्रतिशत होने पर ईएमआई करीब 788 रुपये बढ़ सकती है। वाहन ऋण महंगा होने से ऑटो बिक्री पर दबाव, वहीं एमएसएमई की कार्यशील पूंजी और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। ऑटो, रियल एस्टेट समेत ब्याज-संवेदनशील शेयरों पर दबाव के बीच एफडी निवेशकों को फायदा मिल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक महंगाई नियंत्रित करने और निवेश-विकास की रफ्तार बनाए रखने के बीच संतुलन अहम होगा।
विज्ञापन

महंगाई पर लगाम और निवेश की रफ्तार के बीच संतुलन की चुनौती
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य राजू कुमार गुप्ता ने कहा कि रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित करने के साथ स्थानीय निवेश की रफ्तार बनाए रखने की है। दरें बढ़ने से पूंजी की लागत बढ़ेगी, जिससे निवेश प्रभावित हो सकता है, वहीं महंगाई की अपेक्षाएं स्थिर होने पर वास्तविक आय और बचत की क्रयशक्ति को सहारा मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में महंगाई और विकास के बीच यही संतुलन अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा।
-
ऑटो और शेयर बाजार पर बढ़ेगा दबाव
गोरखपुर। रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का तत्काल असर ऑटो सेक्टर और शेयर बाजार में दिखाई देने लगा। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले वाहन ऋण की लागत बढ़ सकती है। खासतौर पर त्योहारी सीजन में इसका असर वाहन बिक्री की गति पर पड़ने की आशंका है।
विज्ञापन

गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिषेक कुमार के मुताबिक दर बढ़ने के फैसले के बाद शेयर बाजार में ऑटो शेयरों पर दबाव बढ़ा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब दो प्रतिशत की गिरावट आई। ऑटो, रियल एस्टेट और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील अन्य क्षेत्रों के शेयरों पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए कंपनियों की कमाई, मांग, कर्ज का स्तर और आगे की ब्याज दरों की दिशा अधिक महत्वपूर्ण होगी। बैंकिंग शेयरों पर असर प्रत्येक बैंक की जमा और कर्ज संरचना पर निर्भर करेगा। आरबीआई द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत किए जाने से अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है। इसलिए ब्याज दर बढ़ने के बावजूद मजबूत घरेलू मांग बनी रहती है तो ऑटो और व्यापक बाजार पर इसका असर आने वाले महीनों में सीमित भी रह सकता है।
-
एमएसएमई की बढ़ेगी लागत, मुनाफे पर असर
गोरखपुर। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि रेपो दर में वृद्धि का सीधा असर उद्योगों पर पड़ेगा। रेपो दर 5.50 फीसदी किए जाने से बैंक ऋण पर निर्भर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की कार्यशील पूंजी और उत्पादन लागत बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि रेपो लिंक्ड फ्लोटिंग रेट पर लिए गए सीसी, ओडी, टर्म लोन और मशीनरी लोन की ब्याज दर बढ़ने से उद्योगों की वित्तीय लागत बढ़ जाएगी। जो उद्योग पूरे वर्ष के रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत सरकारी विभागों को तैयार माल की आपूर्ति कर रहे हैं, उनके लिए अतिरिक्त लागत का बोझ लाभ को प्रभावित करेगा। केंद्र सरकार को रेपो दर बढ़ोतरी के प्रभाव को सब्सिडी के माध्यम से स्वयं वहन करना चाहिए।

50 लाख के होम लोन पर हर महीने 788 रुपये बढ़ेगी ईएमआई
सीए विनीत कुमार तुल्स्यान ने कहा कि रेपो रेट में बढ़ोतरी से फ्लोटिंग रेट पर चल रहे होम लोन की ईएमआई पर इसका असर पड़ सकता है। छोटी दिखने वाली 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी लंबी अवधि के होम लोन में परिवार के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
इसका सीधा उदाहरण 50 लाख रुपये के 20 वर्ष के होम लोन से समझा जा सकता है। यदि ब्याज दर 8.25 प्रतिशत से बढ़कर 8.50 प्रतिशत हो जाती है तो ईएमआई करीब 42,603 रुपये से बढ़कर 43,391 रुपये हो जाती है। यानी हर महीने लगभग 788 रुपये अधिक चुकाने होंगे।
रेपो रेट में मामूली वृद्धि का असर केवल बैंक की ब्याज दर में नहीं, बल्कि घर के मासिक बजट में भी दिखाई दे सकता है। जिन परिवारों पर पहले से अन्य ऋण या नियमित खर्च का दबाव है, उनके लिए इसका असर अपेक्षाकृत अधिक महसूस हो सकता है।
ब्याज दर बढ़ने का दूसरा पक्ष बचत करने वालों के लिए सकारात्मक हो सकता है। एफडी और अन्य ब्याज आधारित निवेशों पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ सकती है। दूसरी ओर, महंगे ऋण से घर, वाहन और अन्य बड़े खर्चों के साथ कारोबार के निवेश फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए 0.25 प्रतिशत की वृद्धि को केवल ईएमआई बढ़ने के तौर पर नहीं देखना चाहिए। यह महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। कर्ज लेने वालों के लिए इस समय अनावश्यक ऋण से बचना, ईएमआई का बजट बनाना और पर्याप्त नकदी बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें