पुलिस ने अपराधियों की नकेल कसी तो नर्सिंगहोम संचालकों की छांव में अपना धंधा जमा लिए हैं। सुधार का चोला पहनकर गरीब मरीजों को लूट रहे हैं। इसकी हकीकत आपस में मरीज को लेकर गुटबाजी में गोली चलने पर ही समाने आ रही है।
वर्ष 2018 में कमिश्नर आवास के पास फायरिंग का मामला हो या फिर शनिवार सुबह डीआईजी बंगले के पास फायरिंग की घटना। दोनों में ही वजह एक ही अस्पताल के संचालन को लेकर आपसी रंजिश। हालांकि, एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने इसे बड़ी गंभीरता से लिया है और पुरानी फाइलों को भी खोलना शुरू कर दिया है।
दरअसल, शहरी क्षेत्र में कई छोटे क्लीनिक व नर्सिंगहोम संचालित हो रहे हैं, जिस पर स्वास्थ्य विभाग की नजर ही नहीं पड़ती। जब कभी बड़ा मामला होता है तब स्वास्थ्य महकमा सक्रिय होता है और फिर कार्रवाई की जाती है।
इसी तरह का एक मामला चार अप्रैल 2022 को पैडलेगंज के न्यू लोटस नर्सिंगहोम में सामने आया था। यहां पर मरीज को बंधक बनाकर रुपये के लिए दबाव बनाया जा रहा था। बाद में पुलिस के जाने पर छोड़ा गया था। इस मामले में सीएमओ के आदेश पर नर्सिंगहोम को सील भी किया गया था।
बताया जा रहा है कि तब यहां पर कामकाज देखने वाला आदित्य सिंह इसके बाद ही जेएस अस्पताल का काम देखने लगा। शनिवार को आदित्य सिंह के विवाद में ही सूरज सिंह हिस्ट्रीशीटर ने फायरिंग की है।