बाढ़ बचाव का पूर्वाभ्यास।
- फोटो : अमर उजाला।
पूर्वाभ्यास के तहत तहसील सदर सभागार में बने ईओसी (इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर) में वायरलेस पर सुबह करीब 10 बजे अचानक एक मैसेज गूंजा। पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना दी गई कि अत्यधिक बारिश की वजह से रामगढ़ताल का पानी आसपास के मोहल्लों में घुस गया है। मुख्य सड़क पर यातायात ठप हो गया है। इसी बीच नौका विहार पुलिस पिकेट पर बनी बाढ़ चौकी से सूचना प्रसारित होते ही बाढ़ राहत व बचाव से जुड़े अधिकारी सक्रिय हो गए। यातायात पुलिस ने एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को ग्रीन कॉरिडोर उपलब्ध कराया, ताकि वे निर्धारित समय पर मौके पर पहुंच सकें।
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बाढ़ बचाव का पूर्वाभ्यास।
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ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा मिलते ही पुलिस की सायरन बजातीं गाड़ियां और टीमें फटाफट मौके पर पहुंच गईं। बाढ़ के पानी में फंसे 84 लोगों को एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमों ने स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया। इसमें कुल 48 महिलाएं, 11 बच्चे तथा 26 पुरुष शामिल रहे। राहत शिविर में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई।
महिलाओं का ध्यान रखने के लिए तहसीलदार चौरीचौरा नीलम तिवारी मौजूद रहीं। राहत शिविर का संचालन तहसीलदार सदर के नेतृत्व में था। शिविर में चल रहे कम्युनिटी किचन से बाढ़ प्रभावितों को गर्म भोजन उपलब्ध कराया गया।
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बाढ़ बचाव का पूर्वाभ्यास।
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राहत और बचाव कार्य के दौरान कुछ लोग नाव से ताल पार कर रहे थे। ताल की धारा में नाव के बेकाबू होने से कुछ लोग पानी में गिर गए। वहां मौजूद एनडीआरएफ ने उन्हें सुरक्षित बचाया। इस दौरान यदि कोई व्यक्ति डूबने के दौरान पानी पी लेता है तो पानी कैसे निकाला जाए, क्या सावधानियां बरती जाएं, इसका प्रदर्शन किया गया। इसके बाद घायलों को जिला अस्पताल की टीम को सौंप दिया गया।
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बाढ़ बचाव का पूर्वाभ्यास।
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इस दौरान डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि आपदा के दौरान हर विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मॉकड्रिल में घरेलू संसाधनों से बने जीवन रक्षक लाइफ जैकेट का सजीव प्रस्तुतीकरण हुआ। इसमें बांस से बनी नाव, थर्माकोल से बने राफ्ट, बोतल, जरिकेन, फुटबॉल आदि से बने राफ्ट का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पुलिस, अग्निशमन विभाग, चिकित्सा, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ सहित अन्य विभागों के लोग मौजूद रहे।