इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि अब नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी जल्द ही प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में मरम्मत कार्य कर पाना भी बेहद कठिन हो जाएगा। यदि दबाव बढ़ने से रेगुलेटर या तटबंध को नुकसान पहुंचा तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके का निरीक्षण नहीं किया है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल तकनीकी टीम भेजकर स्थिति का आकलन कराने और तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसी संभावित बड़े खतरे को समय रहते टाला जा सके।
इस संबंध में सहायक अभियंता अपराजिता सिंह ने कहा, मामला मेरी जानकारी में नहीं है। मैं तत्काल मौके की जांच करवाती हूं। मेरे कार्यकाल में प्लेटफॉर्म का निर्माण या मरम्मत नहीं हुई है। यह कार्य मेरे आने से पहले कराया गया था।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी जल्द ही धंसे प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकता है। ऐसे में मरम्मत की संभावनाएं सीमित हो जाएंगी। यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए और तटबंध को कोई क्षति पहुंची, तो उससे जुड़े गांवों और हजारों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।