प्रतिबंधित आतंकी संगठनों आईएसआईएस और अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से जुड़े कथित ऑनलाइन नेटवर्क की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल तेज कर दी है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अब फॉरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञों के पास हैं।
नाबालिग की ऑनलाइन गतिविधियों और संपर्कों का प्रोफाइल तैयार किया जा रहा है। तिवारीपुर क्षेत्र के इलाहीबाग स्थित माई धीया गड़ही मोहल्ले से बरामद दो लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, एक पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल सामग्री का तकनीकी विश्लेषण शुरू हो चुका है।
फॉरेंसिक टीम डिलीट किए गए डेटा, चैट रिकॉर्ड, ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट, क्लाउड स्टोरेज और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी है। जांच का केंद्र बिहार के सीवान निवासी उस नाबालिग की ऑनलाइन गतिविधियां हैं, जिसके संबंध में एजेंसियों को कुछ इनपुट मिले थे।
जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था, उसके संपर्क किन लोगों से थे और क्या किसी संदिग्ध विदेशी या बाहरी नेटवर्क से उसका संवाद था। इसके अलावा ऑनलाइन लेन-देन और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
एजेंसियों की कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। हालांकि एनआईए और एटीएस की ओर से अभी तक बरामद सामग्री या जांच में मिले किसी ठोस निष्कर्ष को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
डिजिटल डेटा रिकवरी पर विशेषज्ञों की नजर
जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम चुनौती इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सुरक्षित तरीके से डेटा निकालना है। विशेषज्ञ यह जांच करेंगे कि उपकरणों में किसी प्रकार की संदिग्ध फाइल, एन्क्रिप्टेड चैट, इंटरनेट गतिविधियों का रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं। कई मामलों में हटाए गए डेटा की रिकवरी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।