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रियल एस्टेट कारोबारी से 24 करोड़ की ठगी: एक रुपये भेज लाखों का दिखाते ट्रांजेक्शन, फर्जी UPI स्क्रीनशॉट का खेल

Fri, 08 May 2026 01:22 PM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

आरोप है कि वर्ष 2023 में शुरू हुई ठगी में आरोपी गूगल-पे, फोन-पे और बैंक ट्रांजेक्शन के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर कंपनी को गुमराह करते रहे। वित्तीय वर्ष के ऑडिट में जब खातों का मिलान हुआ तो फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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रियल एस्टेट कारोबारी और शेयर मार्केट ब्रोकर विश्वजीत श्रीवास्तव की कंपनी से फर्जी यूपीआई स्क्रीनशॉट के जरिये करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर गुलरिहा पुलिस ने 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी बिहार, झारखंड और कुशीनगर के रहने वाले हैं।

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आरोप है कि वर्ष 2023 में शुरू हुई ठगी में आरोपी गूगल-पे, फोन-पे और बैंक ट्रांजेक्शन के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर कंपनी को गुमराह करते रहे। वित्तीय वर्ष के ऑडिट में जब खातों का मिलान हुआ तो फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।

विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक, वर्ष 2023 में उनकी पहचान कुशीनगर निवासी सोनू जायसवाल से हुई थी। बाद में सोनू ने अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल से मुलाकात कराई। शिवम ने खुद को दिल्ली में कमीशन आधारित मार्केटिंग का अनुभवी कारोबारी बताया और दोनों कंपनी में एजेंट के रूप में काम करने लगे।
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आरोप है कि दोनों ने मिलकर अलग-अलग लोगों से निवेश कराया और कंपनी के अकाउंटेंट हरिकेश प्रसाद को फर्जी ट्रांजेक्शन स्क्रीनशॉट भेजे। इन्हीं स्क्रीनशॉट के आधार पर रकम कंपनी के खाते में जमा मान ली जाती थी, जबकि वास्तविक भुगतान नहीं होता था। जांच में सामने आया कि आरोपी मोबाइल और लैपटॉप की मदद से फर्जी भुगतान रसीद तैयार करते थे। एक लाख रुपये भेजने के नाम पर सिर्फ एक रुपये खाते में ट्रांसफर किया जाता था।

पीड़ित के अनुसार, करीब तीन महीने तक लगातार इसी तरीके से ठगी की गई। पीड़ित का कहना है कि ऑडिट में गड़बड़ी मिलने के बाद आरोपियों से पूछताछ की गई। पहले उन्होंने आरोपों से इन्कार किया लेकिन दस्तावेज दिखाने पर रकम लौटाने का भरोसा दिया। इसके बावजूद रुपये वापस नहीं किए। स्थानीय पुलिस और एसएसपी से शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली।

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