रेडीमेड गारमेंट्स गोरखपुर का दूसरा वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) बन गया है। प्रदेश सरकार ने टेराकोटा के बाद अब इसे गोरखपुर के लिए ओडीओपी के दूसरे विकल्प के रूप में मंजूरी दे दी है। प्रदेश के नौ जिलों में ओडीओपी के दूसरे प्रोडक्ट की मंजूरी मिली है।
गोरखपुर जिला प्रशासन की ओर से रेडीमेड गारमेंट्स को जिले के दूसरे ओडीओपी के रूप में स्वीकृत किए जाने का प्रस्ताव शासन में भेजा गया था। इसमें कहा गया था कि गोरखपुर जिले में रेडीमेड गारमेंट्स की अपार संभावनाएं हैं। फिलहाल यहां के करीब ढाई से तीन हजार लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं। यहां का रेडिमेड गारमेंट्स विभिन्न देशों में भी निर्यात किया जाता हैं। अब प्रदेश सरकार के विशेष सचिव प्रदीप कुमार ने इस संबंध में आयुक्त एवं निदेशक उद्योग ओडीओपी प्रकोष्ठ को पत्र जारी कर दिया है।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ने जताई खुशी
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने प्रदेश सरकार के इस फैसले पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर में हजारों लोगों को नौकरी भी मिलेगी। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से रसूलपुर, पिपरापुर, गोरखनाथ, जाहिदाबाद, बरगदवां आदि इलाके के तकरीबन दो हजार उद्यमी रेडीमेड गारमेंट के कारोबार जुड़े हैं। सालाना करोड़ों मीटर कपड़ा तैयार होता है। कुशल मजदूर भी हैं। अभी इस उद्योग से कम से कम 15 हजार लोग जुड़े हैं। आने वाले समय में यह संख्या ज्यादा बड़ी होगी। ओडीओपी के रूप में मंजूरी मिलने के बाद सरकार की ओर से कई तरह की सुविधाएं मिलने लगेंगी।
जिला पूर्व ओडीओपी ओडीओपी का दूसरा उत्पाद
गोरखपुर टेराकोटा रेडीमेड गारमेंट्स उत्पाद
मिर्जापुर कालीन मेटल उद्योग (ब्रास)
रामपुर पैच वर्क के साथ एप्लिक वर्क और जरी पैचवर्क मेंथा
ललितपुर जरी सिल्क साड़ी खाद्य प्रसंस्करण, स्कूल ड्रेस, रेडीमेड गारमेंट्स होजरी
फर्रुखाबाद वस्त्र छपाई जरी जरदोजी
उन्नाव जरी जरदोजी चर्म उत्पाद
इटावा वस्त्र उत्पाद सिलाई तथा वस्त्र कढ़ाई
कन्नौज इत्र उद्योग अगरबत्ती और धूपबत्ती उत्पाद
वाराणसी रेशम उत्पाद गुलाबी मीनाकारी वुडन से लेकर वेयर व टॉय
रोजाना होता है दो लाख मीटर कपड़े का उत्पादन
गोरखपुर के लिए बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से गोरखपुर रेडीमेड गारमेंट्स के हब के रूप में स्थापित होगा। रेडीमेड गारमेंट्स को मार्केटिंग के लिए बेहतर प्लेटफार्म हासिल हो सकेगा। अब उद्योग विभाग इसे एक कलस्टर के रूप में विकसित कर सकता है। सरकार की ओर से यहां रेडीमेड गारमेंट्स के लिए कॉमन फैसेलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जाएगी। रेडीमेड गारमेंट से जुड़े लोगों को ट्रेनिंग देने के अलावा टूल किट बांटा जा सकता है। रेडीमेड गारमेंट्स के उद्यमियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बैंकों से लोन दिला कर वित्तीय सहयोग कराया जाएगा। - आरके शर्मा, उपायुक्त उद्योग
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया का कहना है गोरखपुर में छोटे-बड़े मिलाकर छह हजार से अधिक पावरलूम हैं। तीन बड़े प्रोसेस हाउस भी यहां संचालित होते हैं। रोजाना का आंकड़ा देखा जाए तो करीब दो लाख मीटर कपड़ा तैयार होता है। इनका निर्यात अफ्रीकी देशों में होता है। इसके अलावा देश के अंदर कोलकाता, इंदौर, असम, दिल्ली, लुधियाना, तीरपुर (तमिलनाडु) में भी बेचा जाता है। इसके अलावा स्पोर्ट्स से जुड़े लोवर, अपर, टी शर्ट आदि का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह स्थानीय ब्रांड भी बन चुका है। यहां टेक्सटाइल के कुशल कारीगर बड़ी तादात में हैं। लेकिन बेहतर विकल्प नहीं होने की वजह से वे अन्य राज्यों में काम करते हैं। अब स्थिति बेहतर होगी तो सभी कारीगर अपने घर लौटेंगे। आने वाले एक दो साल में गोरखपुर रेडीमेड गारमेंट्स के मंडी के रूप में विकसित हो जाएगा।
विकसित होना है टेक्सटाइल पार्क
गीडा क्षेत्र में औद्योगिक गलियारे के तहत 100 एकड़ में टेक्सटाइल पार्क का निर्माण किया जाना है। टेक्सटाइल पार्क बनने से रेडीमेड उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। गीडा भी क्लस्टर बनाकर इस उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है।