देवरिया जिले के डाला गांव के रामअवध आखिरकार सीएम से मिलकर अपना दुखड़ा नहीं रो पाए। शनिवार की सुबह पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया। सुबह नौ बजे से कोतवाली पुलिस उन्हें थाने लाई और सीएम का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जाने दिया। इस दौरान पुलिस ने उनकी खूब मेहमान नवाजी की।
रामअवध का करीब 10 घंटे थाने में आवभगत होता रहा। उन्हें कुर्सी पर बैठाया गया। चाय नाश्ता कराने के बाद पुलिस मेस में खाना खिलाया गया। एसडीएम संजीव कुमार ने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। राजस्व अभिलेख में मर चुके डाला गांव के रामअवध तीन साल से अपने जिंदा होने का सबूत लेकर घूम रहे हैं।
सीएम के देवरिया आने की सूचना पर वह अपने गले में सीएम साहब मै जिंदा हुं का स्लोगन लिखा, तख्ती लटका कर घूमने लगे। उनके सीएम से मिलने का ऐलान करते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। अमर उजाला अखबार में रामअवध की खबर प्रकाशित होने और अमर उजाला के डिजिटल वेबसाइट पर खबर चलने के बाद देवरिया से लखनऊ तक के अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे।
शुक्रवार की रात 10 बजे से रामअवध को पुलिस ढूंढ़ने लगी। शनिवार की सुबह कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार मिश्र को वह रामचक गांव में मिले। कोतवाली प्रभारी ने उन्हें एसडीएम के समक्ष पेश किया। रामअवध ने एसडीएम से अपनी पूरी कहानी बताई। एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि रामअवध को न्याय दिलाने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। वह राजस्व अभिलेख में दोबारा जिंदा हो जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि अमर उजाला रामअवध के साथ हो रही नाइंसाफी की कहानी सात दिनों से लगातार प्रकाशित कर रहा है। आरोप है कि 40 साल पहले कमाने गांव से निकले रामअवध को मृतक दिखाकर पट्टीदार ने जमीन हड़प ली है। वह तीन साल से अपने जिंदा होने का केस तहसीलदार न्यायालय में लड़ रहे हैं।