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Gorakhpur: 14 मुकदमे एक दिन में निपटाए, एसएसपी ने पकड़ा खेल

Sat, 28 May 2022 10:40 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

अभिषेक यादव मार्च 2022 में फर्जी लेटर हेड इस्तेमाल से दाखिला के बाद चर्चा में आए थे। 28 जनवरी को जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी गोरखपुर केएन बरनवाल को एक पत्र मिला था, जिसमें गोरखपुर के दुर्गाबाड़ी स्थित राज नर्सिंग कॉलेज एंड पैरा मेडिकल साइंस को लाभ देने के लिए कहा गया था। यह लेटर मिलने पर केएन बरनवाल लखनऊ गए और वहां अधिकारियों से मुलाकात भी की। पूछा कि मान्यता का पत्र जारी हुआ है या नहीं, इसपर ऐसा पत्र जारी करने से इनकार किया गया था।
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एसएसपी विपिन टाड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर में फर्जी मान्यता और जालसाजी के आरोपी राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक अभिषेक यादव पर शिकंजा कस गया है। कोतवाली थाने में वर्ष 2015 के दौरान दर्ज 14 केस की फाइल फिर से खोली गई।

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पुलिस ने मामलों की जांच नए सिरे से की और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। इन मामलों में एक दिन में ही गलत तरीके से फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाई गई थी। अब एफआर लगाने वाले विवेचक व पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

इसके लिए एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने आदेश जारी कर दिया है। सभी विवेचकों की भूमिका जांची जा रही है। उधर, जेल में बंद अभिषेक यादव पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई करने की तैयारी तेज कर दी गई है। गैंगस्टर के बाद अभिषेक की संपत्ति जब्त करके कुर्क की जा सकती है।  
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 जानकारी के मुताबिक, राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में कूटरचित दस्तावेज तैयार करके निर्धारित से ज्यादा सीटों पर दाखिले का खेल शैक्षिक सत्र 2014-15 से ही चल रहा था। अतिरिक्त सीट पर दाखिले की वजह से ही तमाम छात्र परीक्षा से वंचित हो गए। भविष्य तक दांव पर लग गया। पीड़ित छात्रों ने अलग-अलग तहरीर देकर कोतवाली थाने में जनवरी से अप्रैल 2015 के बीच केस दर्ज कराया था।

कोतवाली पुलिस ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने, हत्या की कोशिश, धमकी देने की धाराओं में अलग-अलग 14 केस दर्ज किए थे। लेकिन, गलत तरीके से 23 मई 2016 को सभी मामलों में एफआर लगा कर अभिषेक यादव को बड़ी राहत दे दी गई थी। इस बीच 10 जनवरी 2022 को एक बार फिर कूटरचित दस्तावेज पर दाखिले का मामला सामने आया।

शासन स्तर से मिली तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने एक और केस दर्ज कर लिया , लेकिन, अभिषेक गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। बाद में छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। गोरखनाथ मंदिर का घेराव तक करने पहुंच गए। पिपराइच में जाम लगाकर कॉलेज संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग रखी।

इसी का नतीजा रहा कि तहसीलदार सदर ने 17 मार्च 2022 को पिपराइच थाने में एक और मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मामले में भी अभिषेक यादव को आरोपी बनाया गया। बाद में लखनऊ पुलिस ने भी अभिषेक यादव के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज किया। साथ ही 15 अप्रैल को गोरखपुर स्थित घर से गिरफ्तार करके जेल भिजवा दिया था।

 

एसएसपी ने कराई जांच तो खुला खेल
कॉलेज के छात्रों ने एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा को राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल  कॉलेज केसंचालक अभिषेक यादव के खिलाफ दर्ज पुराने केस और उसमें लगे एफआर की जानकारी हुई। इसके बाद एसएसपी ने गोपनीय जांच कराई। जांच में पाया गया कि सभी मामलों में गलत तरीके से एफआर लगाई गई थी। अब एसएसपी के आदेश पर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सभी मामलों को फिर से खोलकर जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करा दी है।

मान्यता को फर्जी लेटरहेड इस्तेमाल से फिर चर्चा में आए थे अभिषेक
अभिषेक यादव मार्च 2022 में फर्जी लेटर हेड इस्तेमाल से दाखिला के बाद चर्चा में आए थे। माल एवेन्यू में यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी का दफ्तर है। फैकल्टी के अधिकारियों की तरफ से कहा गया कि 28 जनवरी को जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी गोरखपुर केएन बरनवाल को एक पत्र मिला था, जिसमें गोरखपुर के दुर्गाबाड़ी स्थित राज नर्सिंग कॉलेज एंड पैरा मेडिकल साइंस को लाभ देने के लिए कहा गया था।

यह लेटर मिलने पर केएन बरनवाल लखनऊ गए और वहां अधिकारियों से मुलाकात भी की। पूछा कि मान्यता का पत्र जारी हुआ है या नहीं, इसपर ऐसा पत्र जारी करने से इनकार किया गया था। जिस लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया, उसका इस्तेमाल वर्ष 2020 में बंद हो चुका है। मान्यता का पत्र पूरी तरह से फर्जी है। इसी मामले में नर्सिंग कॉलेज के अधिकारी, कर्मचारी और यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी के अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ लखनऊ में केस दर्ज है।
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पिपराइच थाने में 17 मार्च को दर्ज हुआ था केस
राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज, जंगल अहमद अली शाह तुरा बाजार के संचालक अभिषेक यादव के खिलाफ 17 मार्च को पिपराइच थाने में केस दर्ज कराया गया था। यह केस तहसीलदार सदर वीरेंद्र कुमार गुप्ता की तहरीर पर हुआ था। तहसीलदार सदर ने तहरीर में लिखा था कि कॉलेज ने वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2021-22 में छात्र-छात्राओं से एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग में प्रवेश के लिए मनमाना शुल्क वसूला है।

पिछले चार वर्षों में कॉलेज के किसी भी छात्र को कोई डिग्री नहीं दी गई है। कॉलेज प्रबंधन ने अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ किया है। सीएमओ ने कॉलेज की जांच कराई तो मान्यता फर्जी पाई गई। कूटरचना करके छात्र-छात्राओं को गुमराह किया गया है।

एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि अभिषेक यादव के मामले में गलत तरीके से एफआर लगाने की जानकारी मिली थी। जांच कराई गई तो मामला सही पाया गया। सभी मामलों की फिर से जांच कराकर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अब गैंगस्टर के तहत अभिषेक यादव पर कार्रवाई की जाएगी। पुराने मामलों में एफआर लगाने वाले विवेचकों की भूमिका की भी जांच का आदेश दे दिया गया है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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