रेलवे की इस व्यवस्था के तहत बस या ट्रक को डिजाइन करके इस तरह तैयार किया जाएगा कि उसमें उपकरणों के साथ ही बैठने का भी इंतजाम होगा। यह पूरी तरह एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन का विकल्प होगा। इसके लिए 24 घंटे स्टॉफ तैनात रहेंगे।
रेल हादसे या ट्रेन के पटरी से उतरने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य के तरीके अब बदलने जा रहे हैं। रेलवे अब पारंपरिक एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (एआरटी) की जगह रोड मोबाइल रेस्टोरेशन व्हीकल का इस्तेमाल करेगा। इससे दुर्घटना स्थल तक राहत टीम तेजी से पहुंच सकेगी और ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित नहीं होगा। दूसरे ट्रैक से ट्रेनों का संचालन जारी रखा जा सकेगा
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पूर्वाेतर रेलवे के तीनों मंडल लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर के आठ प्रमुख जंक्शन स्टेशनों पर रोड मोबाइल रेस्टोरेशन व्हीकल की व्यवस्था की जाएगी। इसकी कार्ययोजना रेल प्रशासन ने तैयार कर ली है। रोड मोबाइल रेस्टोरेशन व्हीकल में भी एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन की तरह राहत एवं बचाव के सारे उपकरण रखे जा सकेंगे।
इसके अलावा 15 से 20 स्टॉफ के बैठने का इंतजाम भी होगा। सह सड़क मार्ग से हादसे वाली जगहों पर पहुंचने में पूरी तरह सक्षम होगा। पटरी से उतरे वाहनों को वापस पटरी पर लाने (री-रेलिंग) में बेहद उपयोगी साबित होगा। खास बात है कि एआरटी को रवाना करने से पहले ड्राइवर, लोको पायलट सहित स्टॉफ का प्रबंध करना पड़ता है। इसमें काफी समय लग जाता है। रोड मोबाइल रेस्क्यू वैन तुरंत रवाना हो जाएगी।
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बस या ट्रक को बनाया जाएगा रेस्कयू वैन
रेलवे की इस व्यवस्था के तहत बस या ट्रक को डिजाइन करके इस तरह तैयार किया जाएगा कि उसमें उपकरणों के साथ ही बैठने का भी इंतजाम होगा। यह पूरी तरह एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन का विकल्प होगा। इसके लिए 24 घंटे स्टॉफ तैनात रहेंगे।
ये फायदे होंगे
- ट्रेनों को रोकना नहीं पड़ेगा - लोको पायलट, गार्ड व अन्य स्टॉफ को जुटना नहीं होगा
इन स्टेशनों पर होगी सुविधा
गोरखपुर, गोंडा, ऐशबाग, मैलानी, छपरा, मऊ, बनारस और कासगंज।
होंगी ये सुविधाएं
मल्टी-एक्सल, मल्टी-व्हील ड्राइव ट्रक, हल्के पिकअप वाहन, हाइड्रोलिक री-रेलिंग उपकरण, अन्य सांकेतिक उपकरण
इसकी व्यवस्था के लिए निर्देश जारी
संरक्षा की दृष्टि यह महत्वपूर्ण पहल है। रोड मोबाइल रेस्टोरेशन व्हीकल तैयार करने के लिए एनईआर के सभी मंडल मुख्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने महत्वपूर्ण स्टेशनों पर इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करें: सुमित कुमार, सीपीआरओ-एनईआर