पूर्वोत्तर रेलवे में किराया व जुर्माना लेने के लिए टीटीई को टू जी नेटवर्क की पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनें थमा दी गई हैं। जैसे ही ट्रेन चलती है, नेटवर्क की समस्या आ जाती है। बीते छह महीने में इस मशीन से एक भी टिकट का किराया या जुर्माना ऑनलाइन जमा नहीं हो पाया है। ‘कबाड़’ मशीन के चलते रेलवे की हाईटेक बनने की योजना फ्लाप हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, पूर्वोत्तर रेलवे में वर्ष 2021 में एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) से कुल 896 पीओएस मशीनें खरीदी गईं। सितंबर 2021 में टीटीई को यह मशीनें दे भी दी गईं। साथ एक्ससेस फेयर टिकट (ईएफटी) व्यवस्था समाप्त कर दी गई। लेकिन, जब मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ तो नेटवर्क की समस्या हर जगह आने लगी।
चलती ट्रेनों में पीओएस मशीन का इंटरनेट कनेक्शन नहीं पकड़ता है। इस मशीन में वाईफाई से कनेक्ट करने की भी सुविधा नहीं है। लिहाजा, अब ये मशीनें टीटीई के बैग में ही रखी रहती हैं।
ईएफटी से फिर बना रहे टिकट
पीओएस मशीनों के काम नहीं करने पर रेल प्रशासन ने एक्सेस फेयर टिकट (ईएफटी) की सुविधा फिर से शुरू करा दी है। हालांकि, अब ईएफटी से बनने वाले टिकट का ब्योरा रोजाना कंप्यूटर में फीड किया जा रहा है, ताकि किसी तरह का फर्जीवाड़ा न हो सके।
फर्जीवाड़ा को रोकने की थी योजना
पीओएस मशीन का इस्तेमाल करके रेलवे की योजना, जुर्माना व किराया लेने में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकना है। कई बार फर्जी टीटीई भी पकड़े जा चुके हैं। इसी प्रकार कुछ टीटीई द्वारा नकली ईएफटी से किराया लेने की बात भी सामने आ चुकी है। वहीं, मशीन के माध्यम से जो भी भुगतान होगा, वह सीधे एसबीआई में रेलवे के खाते में पहुंच जाएगा। टीटीई को रास्ते में पैसा सहेजने और उसे काउंटर पर जमा करने से छुटकारा मिल जाएगा।
पीओएस मशीनें, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से प्राप्त हुई थीं। उसमें टू जी नेटवर्क होने से कनेक्टिविटी से संबंधित समस्याएं सामने आई हैं। इन समस्याओं का निस्तारण कराने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखा गया है। -पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे
एनईआर में कहां, कितनी मशीनें
मंडल संख्या
इज्जतनगर 190
लखनऊ 432
वाराणसी 258
स्क्वॉड टीम 16