- यूपी में एसजीपीजीआई के बाद दूसरा संस्थान होगा जहां इस मशीन से इलाज हो सकेगा
- दिमाग की नस जला जानलेवा दर्द से दिलाएंगे मुक्ति
गोरखपुर। बहुत तेज और असहनीय चेहरे के दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स के पेन मेडिसिन विभाग में जल्द ही ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के मरीजों का अत्याधुनिक तकनीक से इलाज शुरू होगा। इसके लिए विभाग ने रेडियो फ्रीक्वेंसी मशीन मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसजीपीजीआई के बाद एम्स यूपी का दूसरा संस्थान होगा, जहां इस मशीन से मरीजों का इलाज हो सकेगा। अभी तक पूर्वांचल के मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ जाना पड़ता है। पेन मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रविशंकर शर्मा के अनुसार, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मरीज के चेहरे के आधे हिस्से में असहनीय दर्द होता है। कई बार यह दर्द बिजली के झटके जैसा महसूस होता है, जो सामान्य गतिविधियों जैसे ब्रश करने या चेहरे को छूने पर भी शुरू हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी का कारण दिमाग की पांचवीं नस (ट्राइजेमिनल नर्व) में जलन या क्षति होता है, जो चेहरे से मस्तिष्क तक संवेदनाएं पहुंचाती है। इस नस की तीन शाखाएं सिर, गाल और जबड़े तक दर्द का संचार करती हैं। नई तकनीक के तहत रेडियो फ्रीक्वेंसी मशीन की मदद से प्रभावित नस को नियंत्रित (एब्लेशन) किया जाएगा। इसमें मेडिकल ग्रेड अल्कोहल या रेडियो फ्रीक्वेंसी ऊर्जा के माध्यम से नस के उस हिस्से को निष्क्रिय किया जाता है, जिससे दर्द उत्पन्न हो रहा होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुरक्षित और प्रभावी है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक दर्द से राहत मिल सकती है। एम्स गोरखपुर में इस सुविधा के शुरू होने से पूर्वांचल के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।