पूर्वांचल विकास बोर्ड के मुख्यमंत्री के सलाहकार साकेत मिश्र के सामने अपनी समस्याएं गिनाते हुए शहर के कई उद्यमियों ने कहा कि सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी है। जब तक इन्हें दूर नहीं किया जाएगा, पूर्वांचल में उद्योगों का विकास संभव नहीं है। उद्योग लगाने में सबसे बड़ी समस्या बैंक, बिजली और जमीन से जुड़ी हुई है। बैंकों का सहयोग नहीं मिल रहा। सब्सिडी के लिए बैंक दौड़ा रहे हैं। दूसरे राज्यों की तुलना में यहां विद्युत बिल ज्यादा देना पड़ रहा है जिससे उत्पादन की लागत बढ़ जा रही है। नतीजा बिक्री में दिक्कत के रूप में सामने आ रहा है।
मुख्यमंत्री के सलाहकार बुधवार को गीडा कार्यालय सभागार में उद्यमियों के साथ बैठक कर रहे थे। इस दौरान उद्यमियों ने उनके सामने अपनी छह प्रमुख समस्याएं रखीं। उद्यमियों का कहना था कि
उत्तराखंड की तरह, पूर्वांचल के उद्योगों को विशेष आर्थिक पैकेज दिए जाएं। उन्होंने कहा कि यहां की जमीनों का सर्किल रेट अधिक है। मांग की कि गीडा में डाईपोर्ट और रेलवे के साइडिंग की स्थापना कराई जाए।
कुछ उद्यमियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश चिकित्सा समेत कुछ अन्य सरकारी विभागों द्वारा टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए 50 करोड़ के टर्न ओवर की बाध्यता है। इससे लघु उद्योग अपने उत्पाद की आपूर्ति नही कर पा रहे हैं । इस बाध्यता को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों द्वारा की जाने वाली खरीद का निर्धारित 25 प्रतिशत लघु उद्योगों से नहीं खरीदा जा रहा।
बैठक में गीडा के एसीईओ अशोक कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक केआर वर्मा, चेंबर ऑफ इंडस्ट्री के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया, पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल, आर एन सिंह, महासचिव प्रवीण मोदी, आकाश जालान, एहसान करीम, हरिहर सिंह, विनोद सिंह, दीपक अग्रवाल, डॉ एनके सिंह सहित कई उद्यमी मौजूद रहे।