हालांकि, हर जिले में आपदा केंद्र स्थापित है लेकिन अब इसे विस्तार दिया जा रहा है। कार्ययोजना के तहत गोरखपुर को केंद्र बिंदु मानकर क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। 2024 में शासन स्तर से इसके लिए प्रस्ताव मांगा गया था लेकिन इसी बीच लोकसभा चुनाव आ गया और यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
आने वाले समय में गोरखपुर पूर्वांचल का पहला डिजास्टर हब बनेगा। पूर्वांचल में हर साल आने वाली बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए गोरखपुर में क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने चरगांवा क्षेत्र में करीब 1000 वर्ग मीटर जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
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पूर्वांचल के चार मंडलों गोरखपुर, बस्ती, देवीपाटन और वाराणसी में बाढ़ की तबाही ज्यादा है। यहां हर साल लगभग पांच लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि और क्षेत्र राप्ती, रोहिन, घाघरा, गंडक, गंगा और वरुणा आदि नदियों की बाढ़ से प्रभावित होता है। इस क्षेत्र के 30 से अधिक जिले, विशेषकर गोरखपुर, बलिया, बस्ती और आजमगढ़, हर साल भीषण तबाही और जलभराव का दंश झेलते हैं।
गोरक्षनगरी होगी केंद्र
हालांकि, हर जिले में आपदा केंद्र स्थापित है लेकिन अब इसे विस्तार दिया जा रहा है। कार्ययोजना के तहत गोरखपुर को केंद्र बिंदु मानकर क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। 2024 में शासन स्तर से इसके लिए प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन इसी बीच लोकसभा चुनाव आ गया और यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
इसकी कार्ययोजना लोक निर्माण विभाग ने तैयार कर शासन को भेजा था, अब संशोधित कार्ययोजना भेजी गई है।
आपदा नियंत्रण के लिए क्षेत्रीय आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित करने की तैयारी है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है और शासन से मार्गदर्शन मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। इसके खुलने से पूर्वांचल में आपदा नियंत्रण और बचाव कार्य में तेजी आएगी: अनिल ढींगरा, कमिश्नर, गोरखपुर
ये सुविधाएं होंगी - 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में भवन बनेगा - दो मीटिंग हॉल और एक स्टोर रूम
- दो ऑफिस बनेंगे - एक पार्किंग स्थल
इन जिलों को मिलेगी राहत
गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली
हाईटेक निगरानी होगी
- मौसम संबंधी डेटा, हवा की गति, तापमान और संभावित खतरों की 24 घंटे लाइव ट्रैकिंग - आपातकालीन सूचना के लिए उन्नत सैटेलाइट फोन, वायरलेस रेडियो, और क्विक-रिस्पॉन्स टेलीहेल्थ
- बाढ़, भूकंप और भूस्खलन के लिए अत्याधुनिक हाइड्रोलिक उपकरण, लाइफबोट्स, ड्रोन और बचाव दल