राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रांतीय सम्मेलन में शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर निशाना साधा गया। कहा गया कि जन्मजात विषमता को हटाकर समाज में समता और न्याय का वातावरण तैयार करना ही सामाजिक समरसता है।
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यह हर व्यक्ति के मन बदलने का कार्य है, न कि सभा, सम्मलेन, कार्यक्रम और विरोध का। समाज की विशेष परिस्थिति को ध्यान में रखकर पिछले सात वर्षों से सामाजिक समरसता की मुहिम चल रही है। महिला-पुरुष की टोली देश के अलग-अलग खंडों में सामाजिक समरसता बनाए रखने का प्रयास कर रही है।
आरएसएस के पांच दिवसीय (23-27 जनवरी) प्रांतीय सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार के पहले सत्र का उद्घाटन सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने किया। गोरक्ष, काशी, कानपुर और अवध प्रांत के स्वयं सेवकों की मौजूदगी में सह सरकार्यवाह ने कहा कि संघ की टोली महिला, पुरुषों के व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में परिवर्तन का काम कर रही है।
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सामाजिक समरसता के निर्माण में जिन महापुरुषों का विशेष योगदान रहा है, उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मंदिर, श्मशान और जलस्रोत सभी के लिए एक जैसा हो, ऐसा प्रयास करना है। समाज में परस्पर स्नेह, समता, सहयोग का वातावरण बनाने की दृष्टि से सामाजिक समरसता की मुहिम शानदार है।
परिवार के साथ भजन और पड़ोसियों से मंगल संवाद का फायदा
पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के प्रांतीय सम्मेलन में सह सरकार्यवाह ने आदर्श परिवार पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन के जरिए समाज में पारिवारिक आत्मीयता और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें, यह सुनिश्चित किया जाता है। प्रतिदिन या सप्ताह में एक दिन भजन हो तो पारिवारिक प्रेम बढ़ेगा। महीने में पड़ोसियों से मंगल संवाद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन महिला या पुरुष सेवा कर्मियों की मदद से घर चलता है, उनके साथ स्नेह और संवाद अच्छा होना चाहिए। त्योहार सहित कोई भी मौका आए तो सेवा कर्मियों को सस्नेह बुलाया जाना चाहिए। नवदंपतियों में सहयोग, सहभागिता, सहनशीलता, संयम, चरित्र और जिम्मेदारी विकसित करना हमारा कर्तव्य है। घर, परिवार से आलस्य, गलत सामाजिक मान्यताएं, बौद्धिक जड़ता, भय, स्वार्थ और अहंकार त्यागने की मजबूत पहल होनी चाहिए।
त्याग करने की मानसिकता बने, ऐसा प्रयास जरूरी है। इन प्रयासों से घर में देवालय, विद्यालय, आदरालय और सेवालय का वातावरण बनाने में सफलता मिलेगी। यही कुटुंब प्रबोधन का मकसद भी है। क्षेत्र कार्यकारिणी, प्रांत टोली, क्षेत्र और प्रांत गतिविधि प्रमुखों की मौजूदगी में दूसरा सत्र शुरू हुआ। इसमें सामाजिक समरसता पर विस्तार से चर्चा की गई है।
भागवत ने चार प्रांतों के पदाधिकारियों से ली जानकारी
प्रांतीय सम्मेलन के दूसरे दिन सरसंघचालक मोहन भागवत ने गोरक्ष, काशी, अवध और कानपुर प्रांत के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की। धर्म जागरण, ग्राम्य विकास, समरसता, पर्यावरण और गोसेवा सहित छह विभागों की अलग-अलग जानकारी भी ली। इससे पहले प्रार्थना सभा, फिर शाखा में भी हिस्सा लेने पहुंचे।
आरएसएस के राष्ट्रीय और प्रांतीय कर्मचारियों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी की।
आरएसएस के पदाधिकारी के मुताबिक, सरसंघचालक शनिवार को समापन सत्र को संबोधित करेंगे। समापन सत्र की शुरूआत सुबह नौ बजे से होगी, जो अलग-अलग सत्र के हिसाब से आगे बढ़ेगी। इससे गोरक्ष, काशी, कानपुर और अवध प्रांत के स्वयं सेवक उत्साहित हैं। स्वयं सेवकों का कहना है कि सरसंघचालक का संबोधन प्रेरणादायी होता है।
सुरक्षा के इंतजाम सख्त
सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभाषनगर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। एंटी टेरर स्क्वॉड की टीमें भी लगाई गईं। विद्यालय के मुख्य द्वार पर ही बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। परिसर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की जांच हुई। एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता ने शुक्रवार को भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। एसएसपी का कहना है कि विद्यालय परिसर 27 जनवरी तक कड़ी सुरक्षा घेरे में रहेगा।
आरएसएस के प्रांतीय सम्मेलन के लिए सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभाषनगर को सजाया गया है। मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही रंगोली बनाई गई है। साफ-सफाई की व्यवस्था अच्छी है। दरअसल, आरएसएस प्रमुख सुबह, शाम टहलते हैं। इस कारण विद्यालय परिसर की स्वच्छता पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
अगले तीन दिन ऐसे चलेगा कार्यक्रम
25 जनवरी: चार प्रांतों के अधिकारी ग्राम्य विकास, प्रचारक पर्यावरण, समरसता और कुटुंब के क्षेत्र में किए गए कामकाज की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
26 जनवरी: नगर महापालिका मैदान में आरएसएस प्रमुख गणतंत्र दिवस मनाएंगे। सुबह झंडा फहराएंगे, फिर गोरखपुर महानगर के शाखा स्तर के स्वयं सेवकों से बातचीत करेंगे।
27 जनवरी: आरएसएस प्रमुख का पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के जिला प्रचारक व विभाग प्रचारकों के साथ बातचीत।