बनरहां नरकटहां बांध के पूरब से सड़क गांव में जाती है। दोपहर 1.10 बजे यहां मोड़ पर पीपल के पेड़ के नीचे खड़े राम नरेश और सत्यदेव चकबंदी को लेकर ही बात करते मिले। उनसे जब बात की गई तो बताया कि प्रधान प्रतिनिधि अरविंद कुमार आज पीपीगंज गए हैं। वह होते तो ज्यादा जानकारी दे देते। गांव के ही रामचंद्र, सुनई, जीवन सहित अन्य लोगों ने कहा कि जो जमीन जिस क्षेत्र में है, उसी क्षेत्र में चक बनाया जाए। इसमें कोई फेर बदल न किया जाए। यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो चकबंदी को निरस्त करा दिया जाए।
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ग्रामीणों के मुताबिक ताल की जमीन गाटा संख्या 666 व नदी की जमीन गाटा संख्या 131 को भूमिधर जमीन में तब्दील कर वहां चक बैठा दिया गया है। कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। चकबंदी विभाग के अधिकारी इसे गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जो शिकायतें हो रही हैं। उनकी जांच राजस्व विभाग से कराए जाने के बजाय चकबंदी विभाग से कराई जा रही है। इस वजह से समस्या दूर नहीं हो रही।
ग्राम पंचायत की ओर से भेजा गया था प्रस्ताव
गांव में चकबंदी के लिए ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था। प्रधान लीलावती के प्रतिनिधि अरविंद कुमार ने बताया कि तीन महीने पहले चकबंदी के लिए प्रस्ताव सहायक चकबंदी अधिकारी को भेजा गया था। इसके बाद ही प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन इसमें काफी अनियमितता बरती जा रही है।
चकबंदी के नाम पर मजाक चल रहा है। मालियत से लेकर चक लगाने तक में खूब धांधली की जा रही है। इसकी जांच कराई जाए तो मामला सामने आ जाएगा। :हीरालाल, ग्रामीण
अच्छी जमीन को ताल में भेज दिया
कम मालियत के जमीन की बदले अधिक जमीन दी जा रही है। अधिक मालियत की जमीन को कम किया जा रहा है। इससे किसानों को घाटा लग रहा है। अच्छी जमीन को ताल में भेज दिया गया है।:गौतम प्रसाद, ग्रामीण
चकबंदी में कम हो जा रही जमीन
हमारे पास कम जमीन है। चकबंदी में यह चार फीसदी कम हो रही है। इससे हमारा नुकसान हो रहा है। इसलिए हम चकबंदी का विरोध जता रहे हैं। :ब्रह्मानंद यादव, ग्रामीण
लोगों के इशारे पर चक अलग अलग बंट रहे
चकबंदी विभाग के कर्मचारी कुछ लोगों के इशारे पर एक साथ के चक को अलग-अलग टुकड़ों में बांट दे रहे हैं। इससे कुछ यहां तो कुछ वहां जमीन मिल रही। ऐसे में खेती कैसे हो पाएगी। :सत्यनारायण, ग्रामीण