गोरखपुर जिले में जमीन कब्जा करने के मामले में एडीजी के सख्त आदेश के बावजूद पूर्व पार्षद रविंद्र निषाद की मदद करना सेवानिवृत्त दरोगा प्रद्युम्न सिंह को भारी पड़ गया है। मामला संज्ञान में आने पर एडीजी अखिल कुमार ने सेवानिवृत्त दरोगा की पेंशन को रोकने का आदेश जारी किया है। एडीजी ने पूर्व पार्षद के खिलाफ दर्ज केस से हटाई गई गंभीर धाराओं (हत्या की कोशिश, धमकी) को फिर से बढ़ाने के साथ ही गैंगस्टर के तहत संपत्ति को जब्त करने का आदेश भी दिया है। इसके साथ ही एडीजी ने खजनी एसओ के खिलाफ भी विभागीय जांच कराए जाने को कहा है। एडीजी ने चेतावनी दी है कि एक हफ्ते में भू-माफिया पूर्व पार्षद की गिरफ्तारी नहीं हुई तो दोषी पुलिस वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, खजनी इलाके की बरी गांव निवासी अनीता ने कुछ महीने पहले एडीजी से मुलाकात कर शिकायत की थी कि पूर्व पार्षद रविंद्र निषाद उनकी संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। उनकी जमीन पर बनी बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया गया है। इसका एक वीडियो भी उन्होंने एडीजी को दिखाया था।
मामला संज्ञान में आने के बाद एडीजी के आदेश पर खजनी थाने में बाउंड्रीवाल तोड़ने, हत्या की कोशिश, धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इसकी विवेचना प्रद्युम्न सिंह कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के तीन दिन पहले हत्या की कोशिश, धमकी देने की धारा हटाकर मामले को हल्का कर बिना सीओ को जानकारी दिए ही चार्जशीट भी भेज दी।
एक बार फिर मामला संज्ञान में आने पर एडीजी ने जांच शुरू कराई। जांच में पूरा मामला खुलकर सामने आ गया है। एडीजी ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कार्रवाई का निर्देश जारी कर दिया है।
सेवानिवृत्त होने से तीन दिन पहले खेल
जानकारी के मुताबिक, विवेचक प्रद्युम्न सिंह ने सेवानिवृत्त होने के तीन दिन पहले ही पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया था। इसके लिए उन्होंने एसएसपी रहे दिनेश कुमार प्रभु के नाम का इस्तेमाल भी किया था। वरिष्ठ अधिकारियों के पूछने पर उन्होंने एसएसपी के आदेश पर कार्रवाई की बात कह दी। एसएसपी का नाम सामने आने पर एडीजी ने उनसे भी बातचीत की तो मामला पूरी तरह से फर्जी पाया गया। एडीजी को एसएसपी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में इनाम की घोषणा कराई तो फिर वह ऐसा क्यों करेंगे? अब इस मामले में कई और पुलिस वालों की जांच हो सकती है।
एसपी ने दिया था कार्रवाई में प्रगति की रिपोर्ट
एडीजी के मुताबिक, इस मामले में एसपी साउथ की ओर से कार्रवाई में प्रगति की बात कही गई थी, जबकि उस समय इस मामले में लीपापोती हो चुकी थी। एडीजी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
भगोड़ा घोषित होने के बाद बंद कर दी गई फाइल
इस मामले में एडीजी के आदेश पर कार्रवाई तेजी से शुरू हुई। पुलिस ने 82 की कार्रवाई कोर्ट से हासिल कर ली थी। संपत्ति को कुर्क करने का नोटिस भी चस्पा किया गया था। रविंद्र निषाद को भगोड़ा भी घोषित किया गया था, मगर इसके बाद ही फाइल को दबा दिया गया। महिला ने दोबारा शिकायत की तो एडीजी ने कार्रवाई का निर्देश जारी किया है।
बढ़ाई जाएगी रविंद्र पर इनाम की राशि
रविंद्र निषाद पर तब 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, लेकिन उसकी गिरफ्तारी किए बिना ही फाइल को दबा दिया गया था। एडीजी के सामने दोबारा शिकायत आने पर अब इनाम बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि यह मामला पुलिस और भू-माफिया के गठजोड़ का उदाहरण है। आरोपी भू-माफिया की संपत्ति को जब्त कर उसे एक सप्ताह में गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है। एसओ की विभागीय जांच कराई जा रही है। सेवानिवृत्त होने से पहले दर्ज केस में धारा हटाने वाले दरोगा की पेंशन व अन्य लाभ को तत्काल रोकने का निर्देश दिया गया है।
पूर्व पार्षद रविंद्र निषाद ने बताया कि जिस जमीन पर कब्जा की बात कही जा रही है, वह जमीन मेरी बहन के नाम पर है। अनीता की जमीन उसके बगल में है। पुलिस प्रशासन चाहे तो इसकी जांच करा ले। मैं निर्दोष हूं।