एसटीएफ के अनुसार समीर अपने मित्र सरफराज के साथ रक्सौल गया, वहां उन्हें सद्दाम मिला। फिर वहां से तीनों मोतिहारी गए जहां अनीस मिला। अनीस ने दोनों को साउंड बॉक्स दिया। जिसे लेकर ये दोनों गोरखपुर बस से आए। यहां से ये दोनों बहराइच होते हुए नेपाल के काठमांडू जाते। काठमांडू में भैया जी को ये लोग दवाओं से भरा साउंड बॉक्स देते। जिसके बाद इन्हें 50 हजार नेपाली रुपये मिलते।
भैया जी उन नशीली दवाओं को काठमांडू में महंगे दाम पर बेचता। एसटीएफ ने दोनों के पास से साउंड बॉक्स में छिपाया गया 4270 नशीले प्रतिबंधित इंजेक्शन, चार मोबाइल फोन, 2 हजार नेपाली व 1200 भारतीय रुपये, नेपाली नागरिकता व बीजा बरामद किया है। एसटीएफ इंस्पेक्टर की तहरीर पर कैंट पुलिस ने सरफराज व समीर अहमद के खिलाफ केस दर्ज कर शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेजा गया।
इसे भी पढ़ें: 2024 पर अल्पसंख्यकों की नजर, अबकी सबसे सलामत अपना घर
साउंड बॉक्स को खोखला करके इन लोगों ने कपड़े, टीश्युफोम लगाकर काले पॉलीथिन में इंजेक्शन के बॉयल को छिपाए थे। इस तरह से रखा गया कि एक भी बॉयल इंजेक्शन टूटने न पाए। साउंड बॉक्स को देखकर कोई शक भी नहीं करता। अपने पहनावे को भी इन लोगों ने इस तरह से रखा कि किसी को भी देखने में यही लगे कि यह लोग साउंड बॉक्स लेकर ही किसी शादी वगैरह में जा रहे हैं।
सिर्फ दवा की पर्ची पर ही मिल सकते हैं इंजेक्शन
आरोपियों के पास जो दवाएं बरामद हुई हैं, वह सिर्फ डॉक्टर की पर्ची पर ही खरीदी जा सकती हैं। बरामद डायजेपाम, बुप्रेन्योरफिने इंजेक्शन ऑपरेशन के समय मरीजों को बेहोश करने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकती है। वह सीधे डॉक्टर को ही सप्लाई की जाती है। हर कंपनी के चुनिंदा व्यापारियों के पास ही इन दवाओं के बेचे जाने का लाइसेंस भी है। ऐसे में यह दवाएं कैसे बाहर आई और तस्करी कैसे हो रही है, यह एक बड़ा सवाल है।