अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. विस्मिता ने प्रस्तुत किया शोधपत्र
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की प्रो. विस्मिता पालीवाल ने इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 31वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ एप्लाइड साइकोलॉजी में डिजिटल निर्भरता (डिजिटल डिपेंडेंस) पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। शोध में भारतीय किशोरों में इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत और इस संबंध में अभिभावकों और बच्चों की सोच व अनुभवों के अंतर का विश्लेषण किया गया है।
प्रो. पालीवाल ने ''मेज़रिंग द डिजिटल डिपेंडेन्स: रिलायबिलिटी एनालिसिस ऑफ अ बाइ-पर्सपेक्टिव स्केल फ़ॉर इंटरनेट एंड ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन इन इंडियन एडोलेसेंट्स'' विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। सम्मेलन में दुनिया भर के चार हजार से अधिक मनोवैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने उपलब्धि पर प्रो. विस्मिता पालीवाल को बधाई देते हुए कहा कि यह शोध भारतीय मनोवैज्ञानिक अनुसंधान को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य तथा डिजिटल व्यसन जैसे समकालीन विषयों पर प्रभावी शोध को नई दिशा देगा।
प्रो. विस्मिता पालीवाल ने कहा कि उनका शोध बच्चों और किशोरों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता की समय रहते पहचान तथा उनके मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण में उपयोगी सिद्ध होगा। साथ ही अभिभावकों और बच्चों के दृष्टिकोण में मौजूद अंतर को समझकर इस समस्या के प्रभावी समाधान की दिशा में भी मदद मिलेगी।