जानकारी होने पर उसकी पत्नी जूलिया कैफर गोरखपुर चली आई। उसके प्रयास से 31 मई 2017 को मैनफ्रेंड को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। लेकिन जमानतदार न मिलने से रिहाई रुक गई। जिसके बाद जूलिया ने जर्मनी दूतावास व गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के अधिकारियों को पत्र लिखकर मदद मांगी थी। जिस पर विचार करते हुए गृह मंत्रालय ने मैनफ्रेंड को शेष सजा जर्मनी की जेल में काटने की अनुमति दे दी है।
इसके बाद जेल प्रशासन ने गृह मंत्रालय व दूतावास से उसे शिफ्ट करने के बारे में पिछले दिनों पत्राचार किया था। इसी क्रम में जुर्माना राशि जमा कराने के लिए जर्मन दूतावास ने पत्र भेजकर खाता नंबर मांगा है।
गोरखपुर के जेल अधिकारी पत्र को महराजगंज जेल प्रशासन को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जुर्माना जमा होने के बाद उसे यहां से पुलिस फोर्स के साथ दिल्ली दूतावास भिजवाया जाएगा।