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निजी चिकित्सकों को करना होगा अब इस एप का इस्तेमाल, सीएमओ ने जारी किया आदेश

Sun, 20 Dec 2020 02:27 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर में निजी डॉक्टरों को इंसेफेलाइटिस के लिए मोबाइल में एईएस एप डाउनलोड करना होगा। यह आदेश सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने दिया है। उन्होंने बताया कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम में इसके नोटिफिकेशन का विशेष महत्व है। बीमारी की शीघ्र पहचान, समय से इलाज और नोटिफिकेशन से इस बीमारी को नियंत्रित करने में काफी मदद मिली है।

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यह जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि स्वयंसेवी संस्था पाथ और ममता के सहयोग से जिले के निजी चिकित्सकों को इस संबंध में वेबिनॉर के जरिए प्रशिक्षित भी किया गया है। प्रशिक्षण में एसीएमओ व वेक्टर बार्न डिजीज प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने भी प्रतिभाग किया। जिले में 175 निजी चिकित्सकों के मोबाइल में एईएस एप डाउनलोड कराया जा चुका है।

दिमागी बुखार के संभावित लक्षण

  • तेज बुखार एवं सिरदर्द
  • सांस की गति व धड़कन का तेज चलना
  • उल्टी होना
  • शरीर का ढीलापन
  • झटके आना
  • बेहोशी की स्थिति या मानसिक अवस्था में बदलाव

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बच्चे को तेज बुखार आए तो रखें ध्यान

  • यदि बच्चे को तेज बुखार आ रहा है तो उसे पैरासिटामॉल के अलावा बिना चिकित्सक की सलाह के कोई दवा न दें।
  • यदि तेज बुखार बना रहे तो सादे पानी से शरीर को पोछते रहें जब तक बुखार कम न हो। बच्चे को बाएं या दाएं करवट में ही लिटाएं।
  • यदि किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ झटके आ रहे हों तो तुरंत गांव की आशा से संपर्क करना चाहिए ताकि वह तुरंत 108 या 102 एंबुलेंस को बुलाए और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी को पूर्व सूचना दे सके।

दिमागी बुखार यानी इंसेफेलाइटिस को जानिए
यह ज्यादातर एक से 15 साल तक के बच्चों में होता है। यह बरसात के मौसम में खासतौर से होता है और प्रदेश में इसका प्रकोप जुलाई से नवंबर के महीनों में ज्यादा होता है। यह धान के खेत में पैदा होने वाले मच्छर के काटने, जल पक्षी व सुअर के माध्यम से फैलने वाले विषाणुओं, संक्रमित एवं प्रदूषित पानी और गंदगी से तथा चूहों और घुन के काटने से होता है। इसका प्रसार छछूंदर के माध्यम से भी होता है। इस बीमारी के मरीज को समय से अस्पताल न पहुंचाया जाए तो वह दिव्यांग हो सकता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
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