नोटा में कितने लोगों ने वोट किया, इसका भी आकलन किया जाता है। चुनाव के माध्यम से मतदाता का किसी भी उम्मीदवार के अपात्र, अविश्वसनीय और अयोग्य व नापसंद का संदेश होता है। बता दें कि भारत, ग्रीस, यूक्रेन, स्पेन, कोलंबिया और रूस समेत कई देशों में नोटा का विकल्प दिया गया है।
बैलेट पेपर के समय भी विरोध दर्ज कराने का था अधिकार
चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल से पहले जब बैलेट पेपर का उपयोग होता था, तब भी मतदाताओं के पास बैलेट पेपर को खाली छोड़कर अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार होता था। इसका मतलब यह था कि मतदाताओं को चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि किसी मतदाता को यदि अपनी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र का कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज करा सकता है। नोटा के वोटों की गिनती होती है, मगर यह मत अवैध ही माने जाते हैं। यह विरोध दर्ज कराने का माध्यम है। नोटा छोड़कर जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेगा, वही विजयी माना जाएगा।