अनिल गुप्ता ने बताया कि 10 दिन बाद आईसीयू से निकालकर जब लेवल-टू के वार्ड में शिफ्ट किया गया, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने बीएचटी को देखकर हैरानी जताई। डॉक्टर ने मातहतों को फटकार भी लगाई। उसने फौरन इंसुलिन बंद कराया। इसके बाद जाकर हालत में सुधार हुआ।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि इस तरह के मामले की कोई जानकारी नहीं है। न ही कोई अब तक शिकायती पत्र मिला है। अगर ऐसा हुआ है तो इसे दिखवाया जाएगा और मामले की जांच कराई जाएगी।