सरकार ने नकली दवाओं के कारोबार पर रोक लगाने की तैयारी की है। अब किसी मेडिकल स्टोर या ऑनलाइन खरीदी गई दवा के बारे में पूरी जानकारी एक स्कैन के जरिए तुरंत सामने आएगी। इसके लिए दवाओं के बनाने में उपयोग होने वाली एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार के इस पहल से नकली दवाओं के कारोबार पर रोक लगेगी। इसी फैसले के तहत ड्रग प्राइसिंग अथॉरिटी (डीपीए) ने 300 दवाओं पर क्यूआर कोड लगाने की तैयारी कर ली है। प्रदेश के आर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (ओसीडी) के जोनल अध्यक्ष आलोक चौरसिया ने बताया कि इससे दवाओं के दामों में पारदर्शिता आएगी। '
कालाबाजारी पर लगाम लगेगी। जिन दवाओं को क्यूआर कोड के लिए चुना गया है, उनमें पेन किलर, विटामिन्स के सप्लीमेंट, ब्लड प्रेशर, शुगर और कॉन्ट्रासेप्टिव दवाएं शामिल हैं। क्यूआर कोड लगने से इस बात का पता आसानी से लगाया जा सकेगा कि इसके निर्माण में गलत फॉर्मूला तो इस्तेमाल नहीं किया गया है। जोनल अध्यक्ष ने बताया कि नकली दवाओं पर रोकथाम के लिए यह अच्छी पहल है।