दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, स्पेन और नेपाल में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ का केंद्र स्थापित करने की कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है। इसके जरिए नाथपंथ पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध हो सकेंगे। कार्ययोजना तैयार करके केंद्र की स्थापना करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल सेल को सौंपी गई है।
कुलपति प्रो. राजेश सिंह के मार्गदर्शन में इंटरनेशनल सेल प्रस्ताव तैयार करने में जुट गया है। इन शोध केंद्रों से पीएचडी और पोस्ट डाक्टोरल करने वाले शोधार्थियों को फेलोशिप देने की योजना भी है, जिससे शोधार्थियों को शोध के दौरान आर्थिक दिक्कत का सामना न करना पड़े।
इन शोध केद्रों के माध्यम से नाथपंथ के अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर नए तथ्य लोगों के सामने लाने की विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना है। इन केंद्रों से समय-समय पर आनलाइन और आफलाइन अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन होगा।
आठ अप्रैल को होगी एकेडमिक काउंसिल की बैठक
नाथपंथ पर चलाए जाएंगे एक दर्जन डिग्री, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स गोरखपुर विश्वविद्यालय ने नाथपंथ पर 12 डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का फैसला किया है। यह कोर्स हिंदी, योग, दर्शनशास्त्र और भूगोल विभाग के दायरे में संचालित किए जाएंगे। कोर्स का प्रारूप बनाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को सौंप दी गई है। आठ अप्रैल को प्रस्तावित एकेडमिक काउंसिल की बैठक में विभागों द्वारा तैयार प्रस्तावों को रखा जाएगा।