राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के सलाहकार ने जांची तैयारियां।
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गोरखपुर जिले में बाढ़ बचाव की तैयारियां और मॉक एक्सरसाइज को लेकर राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के वरिष्ठ सलाहकार सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रमोद कुमार सिंह ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में समीक्षा की। प्रभारी अधिकारी आपदा राजेश कुमार सिंह और आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तहसीलों के माध्यम से 146 ऐसे गांवों की सूची तैयार की गई है जो कि बाढ़ के मद्देनजर सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। यहां बचाव कार्य को लेकर ठोस योजना तैयार की जा रही है। आपदा विशेषज्ञ ने बताया कि जिले में 86 बाढ़ चौकी और 83 राहत केंद्र व राहत शिविर के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। वरिष्ठ सलाहकार ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं से कहा कि वे तटबंधो के ऊपर मानसून के दौरान खसखस घास स्थापित करें।
उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा आपदा न्यूनीकरण के लिए दिए गए 10 सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा करते हुए कहा कि समुदाय को तैयार करना तथा नई तकनीकी का प्रयोग बहुत उपयोगी है। उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के मोबाइल पर दामिनी एप अपलोड कर वज्रपात से बचाव के संबंध में अभियान चलाकर कार्य कराया जाए। आपदा प्रभारी व एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह ने बताया कि शहर में जलभराव से निपटने के लिए सभी प्रमुख नालों की सफाई कराई गई है। कुछ नए नाले भी बनाए गए हैं।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अधिशासी अभियंता विद्युत, बाढ़ खंड, बाढ़ खंड 2, होमगार्ड, मौसम विभाग, डीपीआरओ, नागरिक सुरक्षा आदि उपस्थित रहे।
आपदा प्रबंधन कार्यालय का किया निरीक्षण
वरिष्ठ सलाहकार ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्यालय का निरीक्षण भी किया। इस दौरान बाढ़ में त्वरित राहत और बचाव कार्य संचालित किए जाने के उद्देश्य से स्थापित किए जा रहे इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (ईओसी) का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।
मॉक एक्सरसाइज के लिए राजघाट भी पहुंचे
सात जुलाई को आयोजित होने वाली मॉक एक्सरसाइज के लिए वरिष्ठ सलाहकार ने राप्ती नदी स्थित राजघाट का भी निरीक्षण किया। वह बोट के जरिए राजघाट से तकिया घाट ( प्रशिक्षण स्थल पर) पहुंचे जहां पर 11वीं एनडीआरएफ द्वारा 99 जवानों, को बाढ़ प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कर रहे इंस्पेक्टर गोपी गुप्ता ने बताया कि पहले 99 जवानों में से सिर्फ 40 से 45 जवान तैरना जानते थे और 50 मीटर तक तैर लेते थे, वहीं अब प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी जवान लगभग 200 मीटर तैरना सीख चुके हैं।