फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: मुक्ताकाशी मंच का संचालन निजी हाथों में सौंपने की तैयारी

विज्ञापन
विज्ञापन
50 हजार रुपये से अधिक मासिक किराए पर दिया जाएगा निजी फर्म को
विज्ञापन


31 तक किए जा सकेंगे आवेदन, उसी दिन ही खोली जाएगी तकनीकी निविदा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जीडीए ने रामगढ़ताल क्षेत्र में स्थित मुक्ताकाशी मंच (ओपेन एयर थियेटर) का संचालन और रखरखाव निजी हाथों में सौंपने के लिए शनिवार को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया। चयनित फर्म को 50 हजार रुपये मासिक से अधिक की राशि पर सुबह 6:00 से रात 12:00 बजे तक निर्धारित गतिविधियां के संचालन की अनुमति होगी। फर्म को मुक्ताकाशी मंच का आवंटन 10 साल के लिए होगा। बाद में इसे पांच साल की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए 31 जुलाई तक आवेदन किए जा सकेंगे। उसी दिन तकनीकी निविदा भी खोली जाएगी।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने महानगर में लोकप्रिय एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण संपत्तियों से ज्यादा आय अर्जित करने के लिए और वहां ज्यादा लोगों को आकर्षित करने के लिए मुक्ताकाशी मंच और योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं संस्कृति केंद्र, इंदिरा बाल बिहार को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय किया था। इसके लिए इच्छुक फर्मों से 21 जून तक आवेदन मांगे थे। 14 जून को बाकायदा इच्छुक फर्मों संग बैठक कर सभी का रुझान भी जाना था।
विज्ञापन

प्राधिकरण के मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि विभिन्न डेवलपर्स के साथ बैठक के बाद मुक्ताकाशी मंच के लिए आरएफपी शनिवार को पोर्टल पर अपलोड की गई। 9700 वर्ग मीटर में बने इस परिसर में 200 लोगों के बैठने की क्षमता का एक ओपेन एयर थियेटर है। इसके अलाव चार ग्रीन रूम, वातानुकूलित दो वीआईपी ग्रीन रूम, महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग दो टॉयलेट ब्लाॅक, एक पंप रूम और एक गार्ड रूम हैं। मंच पर लाइटें भी लगी हैं।
-
इन गतिविधियों को मिली अनुमति
मुक्ताकाशी मंच परिसर में सामाजिक जुटान, सांस्कृतिक गतिविधियां, नर्सरी या उससे संबंधित गतिविधियां, फूड कोर्ट, स्थानीय शिल्पकारों, मूर्तिकारों का बाजार, किसान बाजार, खेलकूद संबंधी गतिविधियां, स्पोर्ट्स क्लब, खेल आदि का आयोजन हो सकेगा।
विज्ञापन


वर्जन
रामगढ़ताल के निकट स्थित मुक्ताकाशी मंच के सुनियोजित ढंग से संचालन की अपार संभावनाएं हैं। निजी फर्मों के जरिए इन्हें संचालित कर प्राधिकरण न केवल अपनी आय में इजाफा चाहता है, बल्कि संपत्ति के बेहतर रखरखाव के साथ महानगरवासियों को नए तरह के अनुभव उपलब्ध कराने की मंशा रखता है।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें