रसोई गैस सिलिंडर की कमी से पहले ही बरती जा रही सतर्कता
पहले के रखे सिलिंडर को बचाने के लिए उपयोग कर रहे इंडक्शन
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर (एम्स) की मेस और कैंटीन में इन दिनों खाना इंडक्शन चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है। गैस सिलिंडर की कमी को देखते हुए पहले से ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी गई है। इसी के तहत रसोई में पहले से मौजूद गैस सिलिंडरों की बचत के लिए इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ा दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।
मेस और कैंटीन में प्रतिदिन कई हजार मरीजों के तीमारदारों, छात्रों और कर्मचारियों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। सामान्य दिनों में रसोई का अधिकांश काम गैस सिलिंडर के माध्यम से ही होता था, लेकिन हाल के दिनों में सिलिंडर की आपूर्ति में संभावित दिक्कतों को देखते हुए कैंटिन में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन चूल्हों का उपयोग शुरू कर दिया गया है। इससे गैस सिलिंडरों की खपत कम हो रही है और मौजूदा स्टॉक को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
कैंटीन के संचालक का कहना है कि इंडक्शन चूल्हों पर चाय, नाश्ता और हल्के भोजन जैसे कई काम आसानी से किए जा रहे हैं। हालांकि बड़े स्तर पर भोजन तैयार करने के लिए अभी भी रसोई गैस का उपयोग किया जा रहा है।
मीडिया प्रभारी डॉ. आराधना का कहना कि गैस सिलिंडरों की आपूर्ति सामान्य होने तक इंडक्शन चूल्हों का उपयोग जारी रखा जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा सकता है ताकि एम्स में आने वाले मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों को भोजन व्यवस्था में किसी प्रकार की परेशानी न हो।