पूरे देश में फैली कोरोना महामारी के चलते डाक कर्मियों की भूमिका बदल गई है। अभी डाकियों के थैले में सिर्फ चिट्ठियां व पैसे ही नहीं बल्कि दवाएं, मास्क और मेडिकल उपकरण भी रहते हैं। कोरोना कर्फ्यू के दौरान डाक विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डाक कर्मियों ने बताया कि कोरोना काल में खुद के बचाव के साथ बिना रुके अपना फर्ज निभा रहे हैं। गोरखपुर के प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि पिछले दिनों कंपनियों की तरफ से भालोटिया मार्केट में दवाएं भेजी गई थीं। ऐसे ही लोगों के घरों तक भी दवाएं भेजी गईं।
एम्स में पहुंचाया एंटीजन किट
एम्स में भी एंटीजन किट से कोरोना की जांच की जा रही थी। किट खत्म होने के बाद देहरादून के क्लीमेंट टाउन से दो स्लॉट की बुकिंग की गई थी। प्रवर डाक अधीक्षक ने बताया कि उन्हें एम्स प्रशासन की ओर से किट को जल्द से जल्द मंगवाने और उन तक भेजवाने के लिए कहा था। इसके बाद इसे देहरादून से इसे प्राथमिकता पर मंगवा कर भेजवाया गया।
केस-1
रायगंज के गोलू के घर उनके रिश्तेदार ने डाकघर के पार्सल के माध्यम से कुछ दवाएं भेजीं थीं। डाकिया ने प्राथमिकता के आधार पर उसे गोलू के घर पहुंचाया। समय से दवा पहुंचाने पर उन्होंने डाकिया का आभार जताया।
केस-2
पादरी बाजार के शमशाद की संक्रमित मां होम आइसोलेशन में थी। बड़ा लड़का आलम लखनऊ में चिकित्सकीय सेवा में है। उसने डॉक्टर से परामर्श कर कुछ दवाएं डाक विभाग के माध्यम से घर भेजा था। जो समय से पहुंच गईं।