डॉ. राजकुमार जायसवाल ने बताया कि ऑक्सीजन पर पूरी तरह से सपोर्ट रहने वाले कई मरीज गंजे हो गए। धीर-धीरे वह जब प्राकृतिक ऑक्सीजन की सपोर्ट पर आए तो भी उनके बाल उतने नहीं आए, जितने आने चाहिए थे। ऐसे मरीजों का फालोअप चल रहा है। लेकिन, उनके बाल आने में ज्यादा समय लगेगा, लेकिन अगर उन्हें फिर कोई बीमारी हो गई तो बाल आना काफी मुश्किल है।
दो तरह के होते हैं बाल
डॉ. राजकुमार ने बताया कि सभी के बालों में दो फेज होते हैं। पहला ग्रोइंग फेज और दूसरा रेस्टिंग फेज। 70 से 80 प्रतिशत हमारे बाल ग्रोइंग के फेज होते हैं और बाकी रेस्टिंग फेज के होते हैं। ऐसे में जब शरीर को ऑक्सीजन बेहतर नहीं मिलता है तो सबसे पहले ग्राेइंग फेज के बाल झड़ने शुरू होते हैं। अगर यहीं पर स्थिति को नियंत्रण में कर ली जाए तो यह नुकसान रेस्टिंग फेज तक नहीं पहुंचता। क्योंकि, एक बार अगर रेस्टिंग फेज में बाल झड़ने शुरू हो गए तो उसे बचान पाना काफी कठिन हो जाता है। कोरोना के मरीजों में भी यही हुआ, जिनके बाल ग्राेइंग फेज के झड़े उनके आने शुरू हो गए हैं।