गोरखपुर में लालपुर टीकर में हत्या के पांच आरोपियों का मुलाहिजा कराने खोराबार पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पहुंचे पुलिस कर्मियों का स्वास्थ्य कर्मियों से विवाद हो गया। आरोप है कि फार्मासिस्ट ने चोट के निशान गिनने में समय लगने की बात कही जिस पर भड़के पुलिस वालों ने उसको गाली दे दी। बीच बचाव में आई महिला डॉक्टर से भी अभद्रता की।
इससे नाराज होकर स्वास्थ्य कर्मियों ने कामकाज ठप कर दिया। सूचना पाते ही एडिशनल सीएमओ डॉ. नंद कुमार स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गए और समझा-बुझाकर कामकाज शुरू कराया। उधर, मुलाहिजा ना होने की वजह से पांचों आरोपियों को पुलिस लेकर थाने लौट गई। यह पूरी घटना स्वास्थ्य केंद्र पर लगे सीसी टीवी कैमरे में कैद हो गई है। स्वास्थ्य कर्मी इसी के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद देर रात पांचों आरोपियों का खोराबार पीएचसी पर मुलाहिजा हो सका।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस हत्या के मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। यहां पर फार्मासिस्ट आनंद प्रकाश सैनी की ड्यूटी थी। बताया जा रहा है कि वह कुछ काम से कहीं गए थे। फिर आए तो बोले कि मुलाहिजा करने में समय लगता है, चोट के निशान गिनने पड़ते हैं। इसी बात पर पुलिसकर्मी नाराज हो गए। बहस होने पर महिला डॉक्टर पहुंचीं।
आरोप है कि उनके साथ भी बदसलूकी की गई। इसकी खबर पाते ही इंस्पेक्टर राहुल सिंह भी पीएचसी पहुंच गए। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने हड़ताल करने का फैसला करते हुए सूचना चस्पा कर दी। आरोपियों का मुलाहिजा कराने के लिए जिला अस्पताल पुलिसकर्मी पहुंचे लेकिन बात नहीं बनी। बाद में सीओ कोतवाली विपुल सिंह समेत कई अधिकारी पहुंच गए लेकिन मुलाहिजा नहीं हो पाया है। हालांकि एडिशन सीएमओ और केंद्र प्रभारी डॉ. राजेश के बीच बातचीत के बाद आम लोगों का इलाज शुरू कर दिया गया। देर रात अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आरोपितों का मुलाहिजा खोराबार पीएचसी पर कराया गया।
एडिशनल सीएमओ डॉ. नंद कुमार ने कहा कि घटना क्रम के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। निर्णय उच्च अधिकारी लेंगे। इधर पीएचसी खोराबार प्रभारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि यदि आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं हुई तो समस्त कार्यों का शनिवार को बहिष्कार किया जाएगा।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि सीएचसी अधीक्षक को मेडिकल कराने का निर्देश दिया गया है। पुलिस की ज्यादती के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई है। साथ ही प्रशासन को भी मामले की जानकारी दी गई है। विभाग स्वास्थ्यकर्मियों के साथ खड़ा है।