जरूरत पड़ने पर कोई भी पंजीकृत बुजुर्ग मोबाइल नंबर से पुलिस को कॉल करेंगे तो उसकी जानकारी डायल 112 के कंट्रोल रूम के स्क्रीन पर आ जाएगी। पुलिस पूरी जानकारी नजदीक पुलिस रिस्पांस व्हीकिल (पीआरवी) को भेजेगी। पीआरवी तत्काल पहुंचकर मदद करेगी। बुजुर्गों का सारा डाटा बीट सिपाही के पास भी रहता है।
क्या कहता है कानून
- कोई भी वरिष्ठ नागरिक, जिसकी आयु 60 वर्ष अथवा उससे ज्यादा है और अपनी आय या अपनी संपत्ति के द्वारा होने वाली आय से अपना भरण पोषण करने में असमर्थ हैं, वो अपने व्यस्क बच्चों या रिश्तेदारों से भरण पोषण प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अभिभावक में सगे और दत्तक माता-पिता और सौतेले माता और पिता भी शामिल हैं ।
- इस कानून में ये भी प्रावधान है कि अगर रखरखाव का दावा करने वाले दादा-दादी या माता.पिता हैं और उनके बच्चे या पोता-पोती अभी नाबालिग हैं तो वो अपने रिश्तेदार जो उनकी मृत्यु के बाद उनका उत्तराधिकारी होगा, पर भी दावा कर सकते हैं।
- ऐसी परिस्थिति में जब वरिष्ठ नागरिक इस शर्त पर अपनी संपत्ति अपने उत्तराधिकारी के नाम कर चुका है कि वो उसकी आर्थिक और शारीरिक जरूरतों का भरण पोषण करेगा और ऐसे में अगर संपत्ति का उत्तराधिकारी ऐसा नहीं करता है तो माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक अपनी संपत्ति वापस ले सकता है ।
- अनदेखी करने पर वरिष्ठ नागरिक अपने क्षेत्र के एसडीएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। एसडीएम द्वारा अधिकतम दस हजार रुपये तक प्रतिमाह का भरण पोषण खर्च वरिष्ठ नागरिक, माता पिता को दिलाया जा सकता है।
नोडल अधिकारी नया सवेरा योजना/एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने कहा कि अब तक जिले के अलग-अलग थानाक्षेत्रों में करीब 32 हजार 104 बुजुर्गों का पंजीकरण हो चुका है। थानेवार पंजीकरण में 8 हजार 460 और डायल 112 के तहत 22 हजार 84 और यूपी कॉप के जरिए 1560 बुजुर्ग सामने आए हैं। इस योजना के तहत बेसहारा बुजुर्गों को कानूनी मदद दिलाने के साथ ही उनकी देखभाल की जाएगी।