नियम भले तोड़ें, कानून नहीं
एसएसपी के मुताबिक, समाज नियम बनाता है। कानून संसद में बनता है। कई बार ऐसा होता है कि नियम तोड़ना पड़ता है। लेकिन, कानून के साथ ऐसा नहीं है। कानून तोड़ने वाले की जगह जेल है।
महिलाओं में रचनात्मक शक्ति ज्यादा
एसएसपी ने कहा कि महिलाओं के लिए समाज में नियम ज्यादा हैं। इसलिए भगवान ने महिलाओं को रचनात्मक शक्ति दी है। हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य महिला सशक्तीकरण है। क्योंकि हमें महिलाओं को सामान्य से भी ऊपर करना है। 33 फीसदी महिला पुलिसकर्मी पुलिस स्टेशनों पर मिलेंगी। महिलाओं के लिए महिला सुरक्षा दल का गठन किया गया है।
संकट में लें हेल्पलाइन नंबर की मदद
पुलिस की पाठशाला के दौरान एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने विद्यार्थियों को आवश्यक हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। कहा कि आपात स्थिति में डॉयल 112 की मदद ले सकते हैं। महिलाओं से संबंधित शिकायत के लिए 1090, साइबर से संबंधित शिकायत के लिए 1930, पारिवारिक विवाद होने पर 181, बच्चों से संबंधित जानकारी देने के लिए 1098 पर संपर्क कर सकते हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर कॉल कर कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है। सामान के गुम होने पर थाने जाने की जरूरत नहीं है। पुलिस विभाग की वेबसाइट पर जाकर ही ई-एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
इनकी रही मौजूदगी
अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, प्रो. नरेंद्र सिंह, प्रशांत मिश्रा, डीन फार्मेसी डॉ. आरती गुप्ता, डॉ. जीतेंद्र सिंह यादव, डॉ. हरवेंद्र पटेल, डीन इंजीनियरिंग डॉ. रुद्र प्रताप सिंह, विनीत राय, आशुतोष राव, डॉ. साची मल्ल, डॉ. मनोज मिश्रा, कुलसचिव डॉ. सतेंद्र कुमार पांडेय, दीप्ति ओझा, अशोक श्रीवास्तव, डॉ. रवींद्र लाल श्रीवास्तव, डॉ. अलका श्रीवास्तव, निवेदिता लाल, खालिद हसन, आशुतोष पांडेय, उप-कुलसचिव केएन प्रसाद, प्रदीप चौधरी, अमितेश मणि त्रिपाठी मौजूद रहे ।
हर सवाल का मिला जवाब
छात्रा प्रीति ने सवाल किया कि अगर सोशल मीडिया पर परेशान करने वाले की जानकारी न हो तो क्या कर सकते हैं? एसएसपी ने बताया कि शिकायत मिलने पर जिस सोशल मीडिया प्लेटफार्म से घटना हुई है, उसे बंद करा, उसपर कार्रवाई की जाती है।
छात्रा अदिति अग्रवाल ने सवाल किया कि महिलाओं के लिए तमाम तरह के हेल्पलाइन नंबर हैं। पुरुष अपनी शिकायत कहां दर्ज कराएं? एसएसपी ने बताया कि पुरुष डॉयल 112 के साथ ही थाने में जाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
छात्रा अपराजिता ने सवाल किया कि एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने वाले लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती है? एसएसपी ने कहा कि इसके लिए जागरूकता जरूरी है। एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने वाले अपने ही समाज के लोग हैं। वैसे अब आईटीएमएस के माध्यम से एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने वालों पर कार्रवाई हो रही है।
छात्रा मेनका गिरि ने सवाल किया कि मंत्रियों की वीआईपी व्यवस्था हो सकती है तो एंबुलेंस से जाने वाले मरीजों की क्यों नहीं? इसपर एसएसपी ने कहा कि सड़क पर चलता कोई भी व्यक्ति एंबुलेंस को रास्ता देकर वीआईपी व्यवस्था उपलब्ध करा सकता है।