गोरखपुर के बड़हलगंज थाने की हवालात में बंद शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण के आरोप में गिरफ्तार प्रदीप साहनी पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया। 21 अगस्त की रात करीब दो बजे पेशाब कराने के लिए बाहर ले जाते समय वह पुलिसकर्मी को चकमा देकर भाग निकला। पुलिस ने करीब 24 घंटे के भीतर उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, इस घटना ने थाने की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस अभिलेखों के मुताबिक, बड़हलगंज थाने में दर्ज प्राथमिकी में पिड़हनी निवासी प्रदीप साहनी को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण समेत अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई थी। गिरफ्तारी के बाद उसे थाने की पुरुष हवालात में रखा गया था।
21 अगस्त की रात पहरे पर तैनात पुलिसकर्मी सच्चिदानंद ने ड्यूटी अधिकारी एसआई संतोष कुमार राय को सूचना दी कि आरोपी ने पेशाब करने के लिए बाहर ले जाने को कहा है। पुलिसकर्मी उसे हवालात से बाहर लेकर जा रहा था। इसी दौरान आरोपी उसे चकमा देकर भाग निकला। घटना की जानकारी मिलते ही थाने में हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मियों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन तत्काल उसका पता नहीं चल सका। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा से फरार होने के संबंध में अलग से विधिक कार्रवाई शुरू की गई।
24 घंटे में दोबारा पकड़ा गया
पुलिस ने फरार आरोपी की तलाश के लिए टीम लगाई। करीब 24 घंटे के भीतर उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपी को जल्द पकड़ लिया गया, लेकिन उसके हवालात से फरार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
निगरानी में चूक या सुरक्षा मानकों की अनदेखी?
पुलिस अभिरक्षा में रखे गए आरोपी को हवालात से बाहर ले जाते समय निगरानी के निर्धारित मानकों का पालन हुआ था या नहीं, यह जांच का विषय है। खासकर आरोपी के खिलाफ बड़हलगंज थाने में पहले से दो मामले दर्ज होने की बात पुलिस अभिलेखों में सामने आती है। ऐसे में पुलिसकर्मी को चकमा देकर हवालात से फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में चूक की ओर इशारा करता है।