चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस नियमानुसार जांच नहीं कर रही है। पुलिस न तो फोरेंसिक टीम बुलाकर साक्ष्य जुटा रही है और न ही डॉग स्क्वॉड से जांच करा पा रही है। जबकि, नियमों के अनुसार डॉयल 112 पर चोरी की सूचना आने पर पहले पीआरवी के पुलिसकर्मी पहुंचेंगे। फिर स्थानीय पुलिस भी मौके पर जाएगी।
स्थानीय पुलिस पीसीआर पर फोन कर डॉग स्क्वॉड और फोरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य एकत्र करेगी। बाद में तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर कार्रवाई करेगी। लेकिन, चोरी के अधिकांश मामलों में यह होता नजर नहीं आ रहा है।
शासन और पुलिस के आला अधिकारी चोरी की घटनाओं को गंभीर अपराध मानते हैं, क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर सवाल भी उठते हैं। लेकिन, पुलिस अक्सर इन घटनाओं को हल्के में लेती है। ज्यादातर मामले में चोरी हुए माल की बरामदगी भी नहीं हो पाती है। केवल चोरी के कुछ आरोपितों को पकड़कर पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी मान लेती है।