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Gorakhpur News: 10 आरोपियों से पुलिस ने की पूछताछ, हाथ लगे कुछ अहम सुराग

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- पूरे गिरोह तक पहुंचने में जुटी पुलिस, एआरओ कार्यालय से मांगे अलग-अलग दस्तावेज
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- देवरिया के रुद्रपुर तहसील में 11 और कुशीनगर के खड्डा में तीन के खिलाफ कैंट थाने में दर्ज है केस



गोरखपुर। चकबंदी से बची नदी के किनारे की जमीनों पर फर्जी परवाना आदेश (नामांतरण) से नाम दर्ज कराने के मामले में जांच कर रही कैंट पुलिस को कुछ और लोगों के शामिल होने सुराग मिले हैं। पुलिस ने नामजद 14 जालसाजों में से 10 से पूछताछ की है और उनके बयान दर्ज किए हैं। मामले में पुलिस ने एआरओ, गोरखपुर से जमीनों के अलग-अलग दस्तावेज मांगे हैं ताकि इस फर्जीवाड़े में शामिल पूरे गिरोह तक पहुंच सके।

फर्जी परवाना के आधार पर जमीनों को अपने नाम करवाने वाले धंधेबाजों का पर्दाफाश फरवरी में हुआ। शिकायत के आधार पर कुशीनगर में तहसील की ओर से लिखापढ़ी कर तीन मामलों में सत्यापन रिपोर्ट डाक से मांगी गई थी। ये मामले बसंतपुर, मरिचहवा और शिवपुर गांव के थे। जबकि, देवरिया में 11 मामले पकड़े गए, ये सभी रुद्रपुर तहसील के गांव के हैं। जांच में पाया गया कि एआरओ गोरखपुर कार्यालय से जमीनों से संबंधित कोई परवाना आदेश जारी नहीं हुआ। जिस आदेश के आधार पर खतौनी में नाम चढ़वाया गया था, वह फर्जी पाया गया। 33 एकड़ से ज्यादा जमीनों पर फर्जीवाड़ा मिला। सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) के पेशकार अंकुर श्रीवास्तव की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 19 फरवरी 2025 को सभी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज कर लिया।
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फर्जी परवाना प्रकरण में अब 10 आरोपियों से पूछताछ हो चुकी है। सभी से जमीनों के साक्ष्य मांगे गए हैं। नामजद शेष अन्य से भी पूछताछ की जाएगी। इस मामले में कुछ और लोगों की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी जांच की जा रही है। एआरओ कार्यालय से कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं।
- योगेंद्र सिंह, सीओ कैंट
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निलंबित रजिस्ट्रार कानूनगो बहाल, जांच भी बंद
कुशीनगर। खड्डा तहसील में फर्जी परवाना जारी कर राजस्व अभिलेख में नाम दाखिल कराने के मामले में निलंबित किए गए रजिस्ट्रार कानूनगो (आरके) अजीत कुमार को बहाल कर दिया गया है। वहीं, विभागीय जांच भी बंद हो गई है।
तत्कालीन डीएम विशाल भारद्वाज के निर्देश पर एडीएम न्यायिक प्रेम कुमार राय की जांच में मार्च में आरके दोषी मिले थे, इनको पडरौना कलक्ट्रेट में अटैच किया गया था। अजीत को अब खड्डा तहसील में ही तैनाती दे दी गई है। एडीएम न्यायिक प्रेम कुमार राय ने बताया कि फर्जी परवाने के मामले में जांच पूरी कर ली गई है। दोषी आरके को निलंबित किया गया था, उन्हें अब बहाल कर दिया गया है। इस मामले से जुड़ी अब कोई जांच नहीं हो रही है।


रुद्रपुर तहसील में जांच पूरी, नहीं मिला कोई दोषी
देवरिया। फर्जी परवाना प्रकरण में चल रही विभागीय जांच पूरी हो गई है। तीन सदस्यीय टीम की जांच में विभाग के किसी कर्मचारी की संलिप्तता नहीं पाई गई। एसडीएम रुद्रपुर हरिशंकर लाल ने बताया कि शिकायत के आधार पर हुई विभागीय जांच में 11 मामले पकड़े गए थे। इसकी तीन सदस्यों से जांच कराई गई थी। जांच में पाया गया था कि एआरओ कोर्ट, गोरखपुर से परवाना जारी नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में एआरओ कोर्ट के पेशकार ने 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। मामले की विवेचना गोरखपुर पुलिस कर रही है। जो भी दस्तावेज मांगे जाएंगे उसे उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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17 मामले भी थे संदिग्ध, सत्यापन ही नहीं हुआ

गोरखपुर। खड्डा तहसीलदार ने 11 फरवरी 2025 को एआरओ कार्यालय में सूची भेजी थी। इसमें शिवपुर के 12, बसंतपुर के चार और मरिचहवा गांव का एक मामला शामिल है। इसे कर्मचारी खुद लेकर आए थे, एआरओ कार्यालय की ओर से सत्यापन के लिए डाक से मांगा गया। लेकिन, तहसील प्रशासन ने बाद में डाक से रिपोर्ट भेजी ही नहीं।
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इन पर दर्ज हुआ है केस
शंकर, जगदीशपुर, रुद्रपुर, देवरिया
राम अशीष, इस्लामाबाद, रुद्रपुर, देवरिया
रवींद्र, सराव खुर्द, रुद्रपुर, देवरिया
अशोक, विशुनपुर बगही, रुद्रपुर देवरिया
चानबली, विशुनपुर बगही, रुद्रपुर देवरिया
प्रताप, कोड़र, रुद्रपुर, देवरिया
शीतल, जगरनाथपुर,रुद्रपुर देवरिया
कोमल, हौलिबलिया, रुद्रपुर देवरिया
राणा प्रताप, हौलिबलिया, रुद्रपुर देवरिया
सूरसती, खोपा, रुद्रपुर देवरिया
शंकर, भेलउर, रुद्रपुर, देवरिया
गुरुशरण, शिवपुर, कुशीनगर
प्रभावती, पड़रौना, कुशीनगर
सर्वा, बसंतपुर, पड़रौना

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