मेडिकल कॉलेज में लगाया गया बोर्ड।
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इन सब के बीच अब पुलिस अफसरों को भी एक मलाल है कि इस गंभीर प्रकरण पर आखिर अन्य विभाग चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। उनके हिस्से की भी जांच करके रिपोर्ट दे दी गई है तो फिर कार्रवाई से गुरेज क्यों? जबकि, चौकी इंचार्ज व दो सिपाही की भूमिका सामने आते ही उन पर कार्रवाई कर दी गई है। बहरहाल, परिसर में लगे बोर्ड कितने कारगर होंगे यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा, लेकिन पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एक संयुक्त प्रयास जरूर किया है।
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दिन में पुलिस की सख्ती के बाद प्राइवेट एंबुलेंस वाले नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन रात में अब भी प्राइवेट एंबुलेंस वाले मरीज लेने पहुंच जाते हैं। इसे देखते हुए पुलिस ने रात में भी गश्त बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि बुधवार की रात में 11 बजे के बाद पुलिस ने ट्रॉमा सेंटर के बाहर गश्त बढ़ा दी है। ऐसे में तीन एंबुलेंस वाले गेट से ही पुलिस देखकर फरार हो गए। उसमें से एक का पुलिस ने दो दिन पहले पांच हजार रुपये का चालान भी काटा था।
एएसपी मानुष पारिक ने कहा कि पुलिस अपनी ओर से मरीजों की मदद की कोशिश कर रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है। जल्द ही सभी विभाग आपस में तालमेल कर माफिया के गठजोड़ से मरीजों को मुक्ति दिलाएंगे।