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Exclusive: खुद की गलती से 'बदनाम' हुई पुलिस, सबने बिगाड़ी कानून व्यवस्था

Thu, 04 Aug 2022 01:10 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।

सार

यही हाल पुराने बदमाशों की निगरानी में भी है। अफसरों को पुलिस वालों की इस लापरवाही की जानकारी तब हो पाती है, जब फिर से वारदात में बदमाश पकड़े जाते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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पुलिस अफसरों के सख्त निर्देश के बाद भी बदमाशों की निगरानी में चूक की वजह से पुलिस बदनाम हो रही है। हाल के दिनों में हिस्ट्रीशीटर हो या फिर जमानत पर बाहर आए बदमाश, वारदात कर सनसनी फैला रहे हैं। उनकी हरकत से कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है तो वहीं, अफसरों की भी नींद उड़ा दे रहे।

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 जानकारी के मुताबिक, अफसर लगातार पुराने व जमानत पर छूटे बदमाशों की निगरानी का आदेश देते रहते हैं। इसके तहत हर थाना पुलिस को उन पेशेवर बदमाशों के वर्तमान लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी रखनी होती है कि आखिर वह जेल से छूटने के बाद क्या कर रहे हैं। मगर, इस काम को पुलिस वाले सिर्फ कागज में ही करते हैं। इसी का फायदा बदमाश उठाते हैं।

यही हाल पुराने बदमाशों की निगरानी में भी है। अफसरों को पुलिस वालों की इस लापरवाही की जानकारी तब हो पाती है, जब फिर से वारदात में बदमाश पकड़े जाते हैं। शाहपुर में बीयर शॉप पर फायरिंग हो या फिर डीआईजी बंगले के पास गोली चलाकर दहशत फैलाने की घटना, सभी में पेशेवर बदमाशों के ही नाम सामने आए हैं।
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केस एक
31 जुलाई की रात कौवाबाग पुलिस चौकी के सामने बीयर शॉप पर तीन बदमाशों ने फायरिंग कर सनसनी फैला दी। इसमें राजन तिवारी व लकी मिश्रा हाल में जमानत पर छूटे थे। हालांकि, पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

केस दो
30 जुलाई को डीआईजी बंगले के पास जेएस अस्पताल पर हिस्ट्रीशीटर सूरज सिंह ने साथियों के साथ फायरिंग की थी। दो महीने पहले इसकी हिस्ट्रीशीट खोलने की रिपोर्ट के बावजूद बेलघाट पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। इसकी निगरानी में भी चूक हुई।

केस तीन
पिपराइच पुलिस से हिस्ट्रीशीटर अच्छेलाल की गतिविधियों की निगरानी में चूक हुई। नतीजा हुआ कि 13 वर्षीय किशोरी छेड़खानी से आहत होकर खुदकुशी कर ली। इस मामले में वांछित हिस्ट्रीशीटर को आजतक पुलिस दबोच नहीं सकी। गिरफ्तारी के लिए टीम लगी है।
 
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पहले भी हो चुकी है चूक
पीपीगंज इलाके में मनीष चौहान, सुनील चौहान सहित पांच बदमाशों को क्राइम ब्रांच की टीम ने तीन जून 2019 को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। बदमाशों ने ओम प्रकाश पांडेय नाम के व्यक्ति की हत्या की सुपारी ली थी। इस मामले में जमानत पर छूटने के बाद बदमाशों ने दोबारा वारदात शुरू कर दी। सिक्टौर गेट पर नौनतवां के व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके अलावा आजाद चौक पर सरिया व्यवसायी के मुनीम से 32 लाख रुपये लूट लिए थे।
  • 23 जनवरी 2019 को शाहपुर इलाके में रानू और रमेश की गोली मारकर हत्या की गई थी। इस मामले में गगहा के भीटी रावत निवासी दुर्गेश यादव, पिपराइच के मनीष साहनी समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। मनीष का नाम खोराबार इलाके में मेडिकल स्टोर संचालक रामाश्रय की हत्या में भी सामने आया है। 25 हजार रुपये इनाम घोषित होने पर वह पुराने केस में जमानत निरस्त कराकर जेल चला गया। इसकी भनक तक खोराबार पुलिस को नहीं लग सकी।
  • 8 मई 2021 को गगहा में जिला पंचायत सदस्य के संभावित प्रत्याशी रितेश मौर्या फिर चंद दिन बाद ही व्यापारी शंभू मौर्या और उनके कर्मचारी संजय पांडेय की गोली मारकर हत्या की गई थी। इन तीनों हत्या में सन्नी सिंह का नाम सामने आया। सन्नी पर इसके पहले भी तिहरा हत्याकांड का आरोप था और जेल भी भेजा गया था। वह जमानत पर ही बाहर आया था। जेल से छूटने पर उसने दोबारा साथियों के साथ मिलकर तीन हत्याएं की।

 जब हुई निगरानी तो फिर गए जेल
  • 18 जनवरी को गुलरिहा पुलिस ने शफीक को मोबाइल फोन लूट के मामले में जेल भेजा था। इसके एक साथी को कैंट पुलिस ने जेल भेजा। दोनों जमानत पर बाहर थे और पुलिस की निगरानी की वजह से फिर जेल गए।
  • 16 जनवरी को सहजनवां पुलिस ने संतकबीरनगर के बखिरा निवासी नीरज मिश्रा को बाइक चोरी में गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चार बाइक बरामद की। यह भी जमानत पर बाहर था और निगरानी का फायदा मिला।
डीआईजी जे रविंद्र ने कहा कि बदमाशों की निगरानी का पुलिस को आदेश दिया गया है। कुछ घटनाएं सामने आने के बाद रेंज के सभी जिलों के पुलिस कप्तान को निर्देशित किया गया है कि इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
 
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