तहरीर नहीं मिलने का हवाला देकर पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो इसका संज्ञान लेकर अधिवक्ता प्रणव थाने पहुंचे और तहरीर दी। उनकी तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
धारा 317 : माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
सजा : सात साल की कैद या फिर जुर्माना या कैद व जुर्माना दोनों
किसी भी मुकदमे में वादी बनने पर गवाही देने के लिए कोर्ट में आना होता है। अगर उस केस में वादी पुलिसकर्मी का स्थानांतरण हो जाए तो भी उसे गवाही के लिए कोर्ट आना पड़ेगा। ऐसे में पुलिस इस प्रक्रिया से बचने के लिए ही वादी नहीं बनना चाहती। पुलिस की यही मनमानी कई मामलों में अपराधियों को सजा से बचा देती है।