उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजी करने वाले चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो बिहार और एक-एक गोरखपुर देवरिया के हैं। बता दें कि पोस्टर, हैंडबिल छपवाकर नौकरी दिलाने के लिए बेरोजगारों को जाल में फंसाने वाले खुद पुलिस की जाल में फंस गए। एसओजी और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर गिरोह का पर्दाफाश किया है।
ये है पूरा मामला
मंगलवार को अपर पुलिस अधीक्षक पंकज ने प्रेस वार्ता कर बताया कि एसपी हेमराज मीणा के निर्देशन में अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा। इसी क्रम में चार जालसाज हत्थे चढ़े हैं। जिनमें निखिल ओझा निवासी चंद्रगोकुल रोड, थाना नगर, जनपद गोपालगंज,बिहार, पवन कुमार पाण्डेय निवासी डीघंवा थाना बैकुंठपुर गोपालगंज, बिहार, रणविजय सिंह बेलकुंडा थाना रुद्रपुर, देवरिया और टिंकूसिंह उर्फ़ राहुल सिंह ग्राम चकटेलना पोस्ट भऊवापारथाना बेलीपार जनपद गोरखपुर हैं।
एएसपी ने बताया कि पुरानी बस्ती के अवधेशकुमार ने गत दिन कोतवाली में तहरीर दी थी। बताया था कि उक्त आरोपियों ने नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये लिए। नौकरी भी नहीं लगी और रकम भी वापस नहीं कर रहे हैं। केस दर्ज कर पुलिस तलाश शुरू कर दी थी। सोमवार शाम को मुखबिर की सूचना पर शिवा कालोनी के पास से चारों को गिरफ्तार किया गया।
एएसपी के मुताबिक पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि विभिन्न कंपनियों का पोस्टर व हैंडबिल छपवाकर दीवारों पर चश्पा करा देते हैं। पोस्टर पर दिए गए मोबाइल नंबर से संपर्क होने वाले कॉल लेटर, ट्रेनिंग एवं वेतन में 9500 से 18000 के बीच योग्यतानुसार कंपनियों में नौकरी देने का आश्वासन दे कर रकम ले लेते हैं। जिसके बाद सिम कार्ड व कार्यालय बंद कर देते हैं।
जैसे ही यह जानकारी हुई कि कुछ लोग पुलिस के पास गए हैं तो कार्यालय का सामान हटाकर भागना चाहते थे, लेकिन पुलिस पहले पहुंच गई। पुलिस टीम ने विभिन्न कंपनियों के पोस्टर, हैंडबिल, रजिस्टर, खाली व भरे लिफाफे, फ़ार्म, सादाकॉल लेटर, वैरीफिकेशन लेटर, मोहर, पैड आदि बरामद किया है। गिरफ्तार करने वाली टीम में कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रामपाल यादव व एसओजी प्रभारी अवधेश राज भी शामिल रहे।