माफिया के कब्जे वाली जगह पर पुलिस को एक बोर्ड भी मिला है। दीवार पर माफिया अजीत शाही की मां और पत्नी के नाम का बोर्ड लगा था। पुलिस को संदेह है कि आसपास की जमीनों पर भी कब्जा है, लेकिन कोई माफिया के डर की वजह से सामने नहीं आया है। पुलिस ने वहां पर बसे लोगों से कागजात की मांग की है, ताकि सच्चाई पता चल सके।
जेल में बंद है माफिया अजीत, दर्ज हैं 35 मुकदमे
माफिया अजीत शाही इस समय जेल के हाई सिक्योरिटी बैरक में है। उस पर अब तक 35 मुकदमे दर्ज हैं। कैंट, शाहपुर, गीडा, गुलरिहा के साथ ही जिले के कई थानों में अजीत शाही पर हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, रंगदारी, बलवा, गुंडा व गैंगस्टर जैसे गंभीर अपराध के मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, अधिकतर मुकदमों में वह बरी है।
अब माफिया का मकान नहीं रहा भूलभुलैया जैसा
सोमवार को अतिक्रमण पर बुलडोजर चलने के बाद माफिया अजीत शाही का मकान अब भूलभुलैया वाला नहीं रहा। पुलिस का कहना है कि जब भी पुलिस अजीत शाही की खोजबीन में जाती थी, इसी रास्ते का इस्तेमाल कर सीधे हाइवे पर आ जाता था और फिर फरार हो जाता था। लेकिन, अब इस पर प्रशासन का कब्जा हो गया है और पीछे से हाइवे पर आने का रास्ता नहीं बचा।
माफिया राकेश यादव के अवैध निर्माण पर भी पुलिस-प्रशासन बुलडोजर चलाने की तैयारी में है। खबर है कि इसके मकान के ध्वस्तीकरण का आदेश डीएम ने एक साल पहले ही दे दिया था, लेकिन माफिया ने कमिश्नर कोर्ट में अपील कर दी। अब पुलिस ने दस्तावेजों के साथ इसकी पैरवी शुरू कर दी है और आदेश को हासिल कर बुलडोजर चलाने की तैयारी है। जीडीए से पता चला है कि जमीन का नक्शा भी पास नहीं है। इसके अलावा विनोद उपाध्याय समेत कुछ और माफिया की भी अवैध संपत्ति को खंगाला जा रहा है।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि माफिया अजीत शाही ने नगर निगम की 32 डिस्मिल जमीन पर अवैध कब्जा किया था। डीएम के आदेश पर बुलडोजर से उसे जमींदोज कर दिया गया है। आगे भी कुछ जमीनों पर माफिया के कब्जे की जानकारी मिली है, उसके दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।